प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, डाकपत्थर सात वर्ष से चिकित्सक विहीन है। अस्पताल का भवन जर्जर हो चुका है। मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा के मद्देनजर अस्पताल को नए भवन में स्थानांतरित किया गया। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की। फार्मासिस्ट ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, डाकपत्थर की दैनिक ओपीडी 40 से 50 के बीच है। वर्ष 2017 में सिंचाई विभाग ने अस्पताल भवन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित किया था। उसके बाद से अस्पताल के बुरे दिन शुरू हो गए। तब से अस्पताल में चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई।
फार्मासिस्ट ही अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों को देख रहे हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें भर्ती भी करते हैं। अस्पताल का भवन बेहद जर्जर हो चुका है। बरसात में भवन की छत से पानी टपकता है। वहीं, जगह-जगह बिजली के तार भी खुले हैं। ऐसे में मरीजों और कर्मचारियों को परेशानी होती थी। बारिश के दौरान भवन में करंट फैलने से मरीजों और कर्मचारियों के उसकी चपेट में आने की आशंका भी रहती थी।
सीएमओ ने अस्पताल का निरीक्षण किया था। उन्होंने पीएचसी को बगल में बने 50 बेड के अस्पताल के तीन कमरों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे। पीएचसी को नए भवन के तीन कमरों में शिफ्ट कर दिया गया है। लेकिन, अस्पताल को अब तक चिकित्सक नहीं मिला। फार्मासिस्ट के वीआईपी ड्यूटी या जरूरी कार्य से जाने पर अस्पताल में ताला लग जाता है।
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वर्जन
पीएचसी, डाकपत्थर में चिकित्साधिकारी की नियुक्ति के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा गया है। नियुक्ति होने तक उप जिला अस्पताल से किसी चिकित्साधिकारी को वैकल्पिक व्यवस्था पर भेजा जाएगा। - डॉ. प्रदीप चौहान, सीएमएस