मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने पतंजलि योगपीठ के खिलाफ याचिका दायर करने और तथ्यहीन पाए जाने पर वादी पर दस हजार का जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने कहा कि बगैर किसी ठोस तथ्य के जनहित याचिका दायर की गई, जिसे मंगलवार को निरस्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता पर न्यायालय का वक्त जाया करने के लिए दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
वादी राजीव श्रीवास्तव ने आरोप लगाया था कि मध्यप्रदेश के धार जिले में पतंजलि का कारखाना लगाने के लिए बाबा को 40 एकड़ जमीन आवंटित की गई। विद्वान न्यायाधीश पीके जायसवाल और न्यायमूर्ति एसके अवस्थी की बैंच ने सुनवाई की।
न्यायालय के जब याचिकाकर्ता से ठोस सबूत मांगे तब वे कोई सबूत नहीं दे पाए। वादी ने केवल इतना कहा कि इस तरह की चर्चा पूरे क्षेत्र सुनी जा रही है। उसका आरोप था कि यह आवंटन अवैध रूप से हुआ।
इस पर न्यायालय की बैंच ने न्यायालय का समय बर्बाद करने का दोषी ठहराते हुए याचिकाकर्ता पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया और याचिका निरस्त कर दी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार ने पूरे नियमों के आधार पर कीमत लेकर भूमि विक्रय किया है। इस संबंध में कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया था। सरकार को विक्रय से पूरा राजस्व प्राप्त हुआ है। नीतियों के अनुसार ही पतंजलि को भूमि आवंटन किया गया है।