एसआईटी जांच में मुन्ना लाल नौटियाल की आयकर विभाग से जुटाई गई रिटर्न की जानकारी से आय कम दर्शाकर छात्रवृत्ति हड़पने के पूरे खेल से पर्दा उठ गया। राजस्व विभाग की ओर से जारी आय प्रमाणपत्र में मामूली मासिक आय के साथ भले ही मुन्ना लाल नौटियाल ‘फकीर’ हाें, लेकिन आयकर के दस्तावेजों के अनुसार 2011 से वह आयकर रिफंड लेते रहे है।
जाहिर है कि उनकी आय खासी ज्यादा रही होगी। जांच में फर्जी दस्तावेजों से लाखाें की छात्रवृत्ति वसूलने में लेखपाल से लेकर समाज कल्याण विभाग के नोडल अधिकारी का घालमेल उजागर हुआ है। अधिवक्ता चंद्रशेखर करगेती ने एसआईटी को मुन्ना लाल नौटियाल की पूरी संपत्ति का ब्योरा उपलब्ध कराया था।
शिकायतकर्ता चंद्रशेखर ने बताया कि विकास नगर में आलीशान मकान के अलावा डांडा नूरीवाला स्थित प्लाट भी उनके नाम है। यही नहीं 2002, 2013 और 2016 में बाप-बेटों के नाम अलग-अलग पते पर कई कारें खरीदी गईं हैं। जाहिर है कि लाखों की संपत्ति के वारिस होते हुए आरोपियाें ने छात्रवृत्ति वसूलने को यह ताना-बाना बुना था।
पहले हैसियत और फिर बनाया आय प्रमाण पत्र
एसआईटी जांच में आया है कि मुन्नालाल नौटियाल ठेकेदारी करते हैं। क्षेत्रीय लेखपाल ने तहसीलदार के माध्यम से मुन्नालाल नौटियाल का पहले हैसियत प्रमाणपत्र जारी कराया था। बड़ी बात यह है कि हैसियत प्रमाण पत्र जारी करने वाले लेखपाल और तहसीलदार ने ही उनकी कम आय का प्रमाण पत्र जारी किया है।
इससे साफ होता है कि मुन्नालाल नौटियाल ने लेखपाल और तहसीलदार से सांठगांठ कर यह पूरा खेल किया है। जबकि दोनों नौटियाल की आर्थिक हालत से पूरी तरह वाकिफ थे।