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Iगहराई में वाटरटैंक, ऊंचाई पर मोहल्ले, घरों में प्रेशर से नहीं पहुंचात पानी
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Iपेयजल लाइन में पानी को डायवर्ट करने के लिए ग्रामीण वाल्व लगाने की कर रहे मांगI
गांव बुल्लावाला-2 के वार्ड नंबर छह के 26 बीघा मोहल्ला में पानी की किल्लत से लोग परेशान हैं। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। गहराई में वाटरटैंक और ऊंचाई पर मोहल्ला होने से घरों में प्रेशर से पानी नहीं पहुंचता है।
विकासखंड डोईवाला की ग्राम पंचायत मारखम ग्रांट का गांव बुल्लावाला वन्य क्षेत्र के पास बसा है। बड़ी आबादी के साथ ही समृद्ध खेती के लिए भी गांव का इलाके में विशेष पहचान है। गांव के अधिकांश क्षेत्र में पेयजल लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है।
लेकिन, गांव बुल्लावाला-2 के वार्ड नंबर छह के 26 बीघा मोहल्ला में पानी की किल्लत से लोग रोज परेशान हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत करीब दो साल पहले गांव में पानी का टैंक स्थापित किया गया था। तभी से धीमे प्रेशर के कारण पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है।
दरअसल, 26 बीघा मोहल्ला वन्य क्षेत्र के पास ऊंचाई पर बसा है, जबकि पानी का टैंक यहां से गहराई में बनाया गया है। इससे पानी ढलान की दिशा में तेजी से आगे की ओर बसे घरों की ओर चला जाता है, जबकि ऊंचाई पर होने के कारण 26 बीघा में पानी बहुत धीमे प्रेशर या नाम मात्र ही पहुंच पाता है। इसमें भी जगह-जगह लीकेज है।
Iवाल्व लगाकर पानी डायवर्ट करने की मांगI
बुल्लवाला-2 में टैंक से निकलने वाला पानी गांव के ढलान की दिशा में बसे लोगों के घरों तक तेज प्रेशर से पहुंच रहा है। जबकि, ऊंचाई पर बसे घरों तक पानी नहीं पहुंच पाता। ग्रामीणों की ओर से लाइन में वाल्व लगाकर पानी को डायवर्ट करने की कई बार अफसरों से मांग की गई। लेकिन, कोई समाधान नहीं हुआ है।
Iदूसरी टैंक से लाइन को जोड़ने की वकालतI
26 बीघा से करीब 700 मीटर दूर गांव झाबरावाला में पानी का बड़ा टैंक बना है। ग्रामीणों की ओर से कई बार लाइन को इससे जोड़ने की मांग की जा चुकी है। लेकिन, विभागीय अफसर कुछ नहीं कर रहे।
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Iपानी की समस्या हर रोज परेशान कर रही है। लेकिन, कोई सुनने वाला नहीं है। पाइप लाइन में यदि वाल्व लग जाए तो शायद परेशानी दूर हो जाए। - कृपाल सिंह, ग्रामीण
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Iकई बार अधिकारियों को मौखिक व लिखित शिकायत दे चुके है। लेकिन, किसी तरह का समाधान नहीं हो सका है। पानी की कमी से दैनिक कार्यों को पूरा करना भी मुश्किल हो रहा है। - जोधा सिंह, ग्रामीणI