उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अस्पतालों पर 50 हजार तक जुर्माना लगाने और वसूली का अधिकार मिल गया है। इसके साथ ही बोर्ड से कहा गया है कि मेडिकल कचरे के निस्तारण की व्यवस्था न करने वाले अस्पतालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। अस्पतालों से 50 हजार तक जुर्माना वसूल किए जाने के संबंध में अपर मुख्य सचिव एस. रामास्वामी की ओर से शासनादेश जारी कर दिया गया है।
इससे पहले तक उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अस्पतालों को इस संबंध में सिर्फ नोटिस जारी करता था। बोर्ड के नोटिसों का अस्पतालों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। इस स्थिति से बोर्ड ने एनजीटी को भी अवगत कराया था। इस पर एनजीटी ने 19 जुलाई को आदेश जारी किए।
एनजीटी के इस आदेश के अनुपालन में अब शासनादेश जारी किया गया है। आदेश में कहा गया है कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम-1986 के मेडिकल वेस्ट रूल्स के प्रावधानों के तहत जुर्माने के 50 हजार रुपये ‘पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति’ के रूप में वसूले जाएंगे। जिन अस्पतालों ने मेडिकल कचरे के निस्तारण और इसके डंपिंग की नियमित व्यवस्था नहीं की है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में एनजीटी ने केंद्र सरकार को भी निर्देशित किया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश में जांच के लिए 728 अस्पताल चिह्नित कर रखे हैं। इनकी जांच कर डिफाल्टरों के खिलाफ जुर्माना ठोका जाएगा।