इसके बाद बाकायदा रजिस्टर में नाम और आईडी के साथ दर्ज किया जाएगा कि कौन पर्यटन अपने साथ कितनी पानी, जूस की प्लास्टिक बोतल, कुरकुरे, चिप्स, टॉफी, चॉकलेट, बिस्कुट सहित अन्य प्लास्टिक रैपर ले जा रहा है। इस सामग्री की संख्या के हिसाब से एक निश्चित शुल्क भी लिया जाएगा। यह धनराशि तब लौटाई जाएगी, जब वे पर्यटकस्थल या धाम से लौटकर साथ ले जाई गई प्लास्टिक बोतल व रैपर वापस लाकर दिखाएंगे। अन्यथा उनकी जमा राशि जब्त कर दी जाएगी। इसके अलावा अर्थदंड के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
इधर, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि बुग्यालों को संरक्षित करने के लिए योजना तैयार कर ली गई है। जो भी पर्यटक अपने साथ पानी या जूस की प्लास्टिक बोतल साथ लाएगा, उससे टोकन मनी के रूप में कम से कम 2 सौ रुपये लिए जाएंगे। जबकि कचरा वापस न लाने पांच हजार रुपये तक जुर्माना वसूला जा सकता है। जरूरत पड़ी तो एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
मध्य हिमालय को प्लास्टिक व कचरा मुक्त करने के लिए योजना बनाई जा रही है। पर्यटकों को अपने साथ लाई प्लास्टिक बोतल व खाद्य सामग्री के रैपर अपने साथ वापस लाने होंगे। इस व्यवस्था के संचालन के लिए वन विभाग व पुलिस को चोपता व सारी में नियमित पोस्ट स्थापित करने को कहा गया है।
- मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग