भगवान आशुतोष के स्वयंभू लिंग के पृष्ठ भाग की पूजा
केदारनाथ में पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है, इसलिए केदारनाथ को हिमवत वैराग्य पीठ भी कहा जाता है, जो पांच पीठों में श्रेष्ठ है। यहां भगवान आशुतोष के स्वयंभू लिंग के पृष्ठ भाग की पूजा होती है। जलाभिषेक के साथ ही दूध और घी का लेपन किया जाता है।
मान्यता है कि केदारनाथ में भक्त और भगवान का सीधा मिलन होता है। जब तक स्वयंभू लिंग पर भक्त घी, चंदन व मक्खन का लेपन नहीं करता, पूजा अधूरी मानी जाती है। केदारनाथ के वरिष्ठ तीर्थपुरोहित श्रीनिवास पोस्ती बताते हैं कि केदारनाथ पहुंचकर शिव भक्त धन्य हो जाते हैं। यहां बाबा के दर्शन से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। नौंवी सदी में आदिगुरु शंकराचार्य ने केदारनाथ पहुंचकर मंदिर का पुनरोद्धार किया था। यहां उनका समाधि स्थल भी है।
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भारत में शिवशक्ति के पांच पीठ
| पीठ |
स्थान |
| हिमवत वैराग्य पीठ |
केदारनाथ/ऊखीमठ |
| श्रीशैल सूर्य पीठ |
आंध्र प्रदेश |
| ज्ञानपीठ |
काशी |
| वीर पीठ |
कर्नाटक |
| सधर्म पीठ |
उज्जैन |