जैन धर्म के पर्युषण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की पूजा की गई। रविवार सुबह श्री महावीर भगवान का प्रथम अभिषेक एवं शांति धारा करने का सौभाग्य प्रवीण जैन को प्राप्त हुआ। प्रवचन देते हुए क्षुल्लक 105 श्री समर्पण सागर महाराज ने उत्तम सत्य धर्म की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि सत्य धर्म से तात्पर्य सिर्फ सत्य वचन बोलना ही नहीं है।
सत्य धर्म और सत्य वचन दोनों भिन्न-भिन्न हैं। सत स्वामी आत्मा के अनुभव से आत्मा में जो शांति स्वरूप वीतराग परिणति उत्पन्न होती है उसे सत्य धर्म कहते हैं। उन्होंने कहा कि सत्य हमेशा सम्मान प्राप्त करता है। सत्य शब्दों में नहीं, अनुभूति में होता है। शब्दों से जो कहा जाता है वह पूर्ण रूप से सत्य नहीं होता। जब तक मनुष्य सत्य से परिचित नहीं होता है, तब तक वह अंदर से सत्य को नहीं पा सकता है।
प्रवचन के बाद दोपहर में वर्णी जैन इंटर कॉलेज में मिठ्ठान लाल सुरेश चंद जैन स्मृति वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें स्कूल के छह से लेकर 10 तक के बच्चों ने प्रतिभाग किया। शाम को श्री आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, माजरा में भजन संध्या ‘एक शाम बड़े बाबा के नाम’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में तुलाज इंस्टीट्यूट के चेयरमैन सुनील जैन ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। भजन संध्या में मुंबई से आए भजन गायक विक्की डी पारीख एंड ग्रुप की विभिन्न भजनों की प्रस्तुति से माहौल भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर अनिल जैन, जैन मंदिर माजरा के अध्यक्ष दिनेश जैन, कांग्रेसी नेता राजीव जैन, अजीत जैन, शैलबाला जैन, प्रीति जैन, पिंकी जैन, नेहा जैन, डॉ. अपूर्व जैन, हर्ष जैन, अक्षय जैन, ऋषभ जैन आदि मौजूद रहे। संवाद