लेकिन, एसआईटी को दिए बयान में मोहन सिंह ने दस्तावेजों में उनके फर्जी हस्ताक्षर होने की बात कही थी। इसके बाद उनके दस्तखतों को जांच के लिए एसआईटी ने देहरादून एफएसएल भेजा, जहां दस्तखत मोहन सिंह के ही होने की पुष्टि हुई।
एसआईटी प्रभारी कमलेश उपाध्याय ने बताया कि दोनों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने के बाद एसआईटी ने बीती रविवार देर रात कलक्ट्रेट स्थित आवास से निलंबित एसडीएम अनिल शुक्ला और काशीपुर स्थित आवास से प्रभारी तहसीलदार मोहन सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
सोमवार को दोनों को मेडिकल के बाद नैनीताल कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। बाजपुर तहसील में ही घोटाले के मामले में चकबंदी अधिकारी अमर सिंह की गिरफ्तारी के लिए भी एसआईटी ने उनके घर पर दबिश दी, लेकिन अमर सिंह के पैर में फैक्चर होने के कारण एसआईटी खाली हाथ लौट गई। अनुमान लगाया जा रहा है कि अमर सिंह भी जल्द एसआईटी की गिरफ्त में होंगे।
रुद्रपुर। मार्च में तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन की ओर से एनएच 74 भूमि मुआवजा घोटाला उजागर करने के बाद शासन के आदेश पर छह पीसीएस अधिकारियों को निलंबित किया गया था।
एसआईटी इनमें से अब तक पूर्व एसएलओ डीपी सिंह, एसडीएम भगत सिंह फोनिया और अनिल शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। घोटाले में लिप्त अभी और तीन पीसीएस अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।