उत्तराखंड में पटवारी बनने के नियम डेढ़ साल में ही बदल गए। डेढ़ साल पहले जब पटवारियों की भर्ती के लिए उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद ने विज्ञप्ति निकाली थी तब अनिवार्य योग्यताएं अलग थी।
तब भर्ती नहीं हो पाई। नए सिरे से जब जिलावार पटवारियों की भर्ती की विज्ञप्तियां निकाली गई हैं तो इसमें भर्ती के मानक अलग हैं। इससे युवाओं में रोष है। प्राविधिक शिक्षा परिषद ने नौ फरवरी 2014 को समूह ग के अंतर्गत प्रदेश में पटवारी के 224 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था।
इसमें अनिवार्य अर्हता में अभ्यर्थी से 12वीं पास होने के साथ ही कंप्यूटर पर हिंदी टाइपिंग में चार हजार की डिपरेशन प्रति घंटा मांगी गई थी। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों के लिए यह शर्त रखी गई थी कि अभ्यर्थी को एक घंटा 30 मिनट में 10 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी है। तब यह शर्त महिला अभ्यर्थियों के लिए लागू नहीं थी।
परिषद की यह प्रक्रिया शासन स्तर से रोक दी गई थी। इसके बाद इस साल जब अधीनस्थ चयन आयोग गठन के बाद जिलावार पटवारी भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई तो यह नियम बदल गए। 10 किमी दौड़ का एक घंटा 30 मिनट का समय घटाकर एक घंटा कर दिया गया।
पहले यह शर्त केवल पर्वतीय क्षेत्रों के लिए थी, अब यह पूरे राज्य के हर जिले के लिए लागू की गई है। साथ ही महिला अभ्यर्थियों के लिए भी अब 35 मिनट में पांच किलोमीटर की दौड़ अनिवार्य कर दी गई है। खास बात यह है कि टाईपिंग में चार हजार की डिप्रेशन की अर्हता भी हटा दी गई है। अभ्यर्थियों में इस बात का लेकर रोष है।
उनका कहना है कि जब यह जिला स्तर की भर्ती का मामला है तो मैदानी जिलों में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर दौड़ की शर्त खत्म की जाए। केवल पर्वतीय क्षेत्र वाले जिलों में ही यह शर्त रखी जानी चाहिए।