राज्य कर्मचारियों के बाद अब पटवारियों को शासन की उलटबांसी का सामना करना पड़ा है। पटवारियों से सहमति बनी कुछ और थी और कार्यवृत्त कुछ और ही जारी हो गया।
पटवारियों की मुख्य मांग को ही शासन ने एक तरह से खारिज कर दिया। नतीजा सामने है। पटवारी अब फिर हड़ताल पर है। साफ है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की दुश्वारियों में अब इजाफा और ही होगा।
1 जनवरी से चल रही हड़ताल
नायब तहसीलदार पद पर 10 प्रतिशत मिनिस्ट्रीयल संवर्ग और छह प्रतिशत आरक्षण अमीन संवर्ग को दिए जाने के विरोध में पर्वतीय क्षेत्र के पटवारी एक जनवरी से हड़ताल पर चले गए थे। बुधवार को सरकार की नींद टूटी तो इसके बाद राजस्व मंत्री यशपाल आर्य की अध्यक्षता में हड़ताली पटवारियों से बातचीत भी हुई।
इस बातचीत में सहमति बन भी गई थी और कार्यवृत्त मिलने के बाद पटवारी हड़ताल समाप्त करने को तैयार भी थे। खुद मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा था कि पटवारियों की हड़ताल समाप्त हो गई है।
कार्यवृत्त पर भड़के
शुक्रवार को दूसरा ही नजारा सामने आया। कार्यवृत्त मिलने के बाद पटवारी और भड़क गए। शुक्रवार को हुई विशेष सभा में सीधे-सीधे आंदोलन को तेज करने और हड़ताल पर कायम रहने का फैसला किया गया।
शासन की ओर से जारी कार्यवृत्त में कह दिया गया कि नायब तहसीलदार पदों पर मिनिस्ट्रीयल संवर्ग के पदोन्नति कोटे के फैसले से पटवारी संवर्ग की पदोन्नति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इतना दिलासा जरूर दिया गया कि संबंधित पक्षों से बैठक तक फैसला किया जाएगा।
इनका है कहना
पटवारी महासंघ के अध्यक्ष रामपाल सिंह रावत, महासचिव धीरेंद्र सिंह कुमाई, प्रवक्ता बीपी जगूड़ी आदि ने कहा कि यह एक तरह से पटवारियों को हड़ताल के लिए उकसाना ही है। लिहाजा आंदोलन और तेज किया जाएगा।
राज्य कर्मचारी भी आंदोलन की राह पर
यही हाल राज्य कर्मचारियों का भी है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद सिंह के मुताबिक परिषद के साथ बनी सहमति के मुख्य बिंदुओं को ही नजरअंदाज कर दिया गया। लिहाजा परिषद को भी आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
हड़ताल का व्यापक असर
पटवारियों की हड़ताल जारी रहने का सबसे अधिक खामियाजा आपदा प्रभावित जिलों में पीड़ितों को करना होगा। पर्वतीय जिलों में पटवारी स्थालीय निरीक्षण से लेकर कई तरह के प्रमाण पत्र बनाने और पुलिसिंग का काम भी करते हैं। देश में एकमात्र उत्तराखंड ही ऐसा राज्य है जहां पटवारियों के जिम्मे यह दोनों काम हैं।