उत्तराखंड के अशासकीय स्कूलों में इस सत्र में हुई सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया है। इसके बाद अब शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नया पैटर्न तैयार किया गया है।
अशासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियां अब इंटरव्यू और अनुभव नहीं केवल एकेडमिक्स की मेरिट के आधार पर होगी। इससे नियुक्तियों में प्रबंधन की मनमानी नहीं चल सकेगी।
वहीं, सरकार ने मौजूदा सत्र में हुई सभी नियुक्तियां भी रद्द कर दी है। जिन विद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया चल रही हैं, वहां अब नए नियमों के आधार पर ही नियुक्तियां होंगी। दूसरी ओर, अशासकीय विद्यालय प्रबंधन ने सरकार के निर्णय के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
बृहस्पतिवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने बताया कि आचार संहिता लागू होने के बाद कुछ अशासकीय विद्यालयों में मनमाने ढंग से नियुक्तियां हुई है।
25-25 लाख रुपये लेकर हुई थी नियुक्तियां
अल्मोड़ा के आर्य कन्या विद्यालय में 25-25 लाख रुपये लेकर नियुक्तियां करने की शिकायत मिली थी, जो विभागीय जांच में सही पाई गई है। विद्यालय प्रबंधन ने इंटरव्यू और अनुभव में अधिक अंक देकर कम मेरिट वालों को नियुक्ति दे दी।
जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद मौजूदा शिक्षा सत्र में हुई सभी नियुक्तियां रद कर दी गई है। साथ ही जिन विद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है, उन्हें भी नए सिरे से कवायद करनी होगी।
नई विज्ञप्ति जारी कर उन्हें केवल एकेडमिक्स की मेरिट के आधार पर नियुक्ति देनी होगी। उन्होंने बताया कि गढ़वाल के 208 और कुमाऊं के 130 अशासकीय विद्यालयों में नियुक्ति होनी है।
विज्ञप्ति जारी होने के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी और विद्यालय प्रबंधन मेरिट तैयार कर नियुक्तियां देंगे। वहीं. जांच में पैसे लेकर नियुक्तियां देने के आरोपों की पुष्टि के बाद कार्रवाई के सवाल को शिक्षा मंत्री टाल गए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने पैसे लिए और जिन्होंने दिए, अब वह दोनों एक दूसरे से निपटेंगे।
गढ़वाल में 1427, कुमाऊं में 393 पद
अब तक ऐसे होती थी नियुक्ति
अभी तक अशासकीय स्कूलों में नियुक्ति मुख्य शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी और प्रबंधन समिति मिलकर करती थी। विज्ञप्ति जारी करने के बाद सीईओ के स्तर से मेरिट तैयार की जाती थी। जिस पर तीन विभागीय एक्सपर्ट और प्रबंधक आवेदकों के इंटरव्यू करते थे। प्रबंधक किसी भी अभ्यर्थी को इंटरव्यू में अधिकतम 18 अंक तक दे सकते थे।
उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों को नुकसान
केवल मेरिट के आधार पर नियुक्तियां होने से उत्तराखंड बोर्ड के छात्र-छात्राओं को नुकसान होना तय है। उत्तराखंड बोर्ड की मार्किंग सीबीएसई व अन्य बोर्ड की तुलना में काफी कठिन रही है। ऐसे में मेरिट में उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों का पिछड़ना तय है।
गढ़वाल में 1427, कुमाऊं में 393 पद
गढ़वाल मंडल के कुल 208 अशासकीय स्कूलों में प्रवक्ता और सहायक अध्यापक के 1427 पद खाली हैं। इसमें 399 प्रवक्ता और 1128 सहायक अध्यापक (एलटी) के पद हैं। वहीं कुमाऊं मंडल में कुल 393 पद रिक्त हैं, जिसमें 131 प्रवक्ता और 262 सहायक अध्यापक (एलटी) के पद हैं।
सरकार विद्यालय प्रबंधन समिति के अधिकार कैसे छीन सकती है। जब नियुक्तियां सरकार ही करेगी तो वर्षों से स्कूल को खड़ा करने वाली समिति का क्या औचित्य? जिन विद्यालयों में पारदर्शी ढंग से शिक्षकों की नियुक्ति हुई है, वहां रोक लने का कोई मतलब नहीं है। बिना इंटरव्यू केवल मेरिट से नियुक्ति पूरी तरह गलत है। हम सरकार के इस निर्णय के खिलाफ कोर्ट जाएंगे।
देवी जोशी, प्रांतीय महासचिव, अशासकीय स्कूल संघर्ष समिति