डेंगू, वायरल बुखार और मौसमी बीमारियों के चलते राजधानी के सभी सरकारी अस्पताल पूरी तरह पैक हैं।
सभी अस्पतालों में वार्डों के साथ ही इमरजेंसी भी फुल हो गई है। इसके चलते अब नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। अस्पताल से मरीजों को बिना उपचार के लौटाया जा रहा है। लिहाजा गरीब मरीज प्राइवेट अस्पतालों में अपने खर्च पर उपचार कराने को मजबूर हैं। इससे उन्हें संकट का सामना करना पड़ रहा है।
दून अस्पताल : चार दिन से स्ट्रेचर पर मरीज
सबसे ज्यादा भीड़ राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पताल में है। भीड़ आलम यह है कि पिछले चार दिनों से कई मरीज स्ट्रेचर पर लेटकर इलाज कराने को मजबूर हैं। बेड खाली नहीं होने के कारण इन्हें इमरजेंसी में ही स्ट्रेचर पर रखा गया है। अस्पताल के वार्ड और इमरजेंसी वार्ड में बिल्कुल भी जगह खाली नहीं है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने हर वार्ड में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की है, लेकिन मरीजों की भीड़ के चलते यह नाकाफी साबित हो रहा है।
कोरोनेशन : एक मरीज की भी नहीं जगह
कोरोनेशन अस्पताल में भी नए मरीजों के लिए जगह नहीं है। अस्पताल के वार्डों में 57 बेड और इमरजेंसी में छह बेड हैं। इसके बावजूद अस्पताल में क्षमता से ज्यादा 70 से अधिक मरीज भर्ती हैं। वार्डों में बेड खाली नहीं होने की स्थिति में मरीजों को गैलरी में बेड लगाकर उपचार दिया जा रहा है। सीएमएस डॉ. भारती राणा ने बताया कि इमरजेंसी के लिए भी बेड खाली नहीं है। उन्होंने बताया कि बेड की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।
प्रेमनगर अस्पताल : 40 बेड और 56 मरीज
प्रेमनगर संयुक्त चिकित्सालय में डिलिवरी और पोस्ट सर्जिकल मामलों के मरीज सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा वायरल और मौसमी बीमारियों के मरीज भी भर्ती हैं। आलम यह है कि 40 बेड के अस्पताल में 56 मरीज भर्ती हैं। डिलिवरी के इमरजेंसी मामलों के लिए अस्पताल की ओर से अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। हालांकि, मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। सीएमएस डॉ. दयाल शरण ने बताया कि कुछ मरीजों के डिस्चार्ज होने के बाद ही नए मरीज भर्ती किए जा सकेंगे।
अस्पताल में क्षमता से कहीं अधिक मरीज भर्ती हैं। अब एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया जा सकता है। स्ट्रेचर पर लिटाकर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इमरजेंसी मामलों को भर्ती करने में भी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
- डॉ. केके टम्टा, चिकित्साधीक्षक
अस्पतालों को अतिरिक्त व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मरीजों को इलाज के बिना लौटना ना पड़े, इसकी व्यवस्था की जा रही है। अब सभी अस्पताल पूरी तरह पैक हो गए हैं, फिर भी अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है।
- डॉ. वाईएस थपलियाल, प्रभारी सीएमओ