I
Iस्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार की ओर से गाइडलाइन जारी होने के बाद दून अस्पताल की इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार लेने के लिए संघर्ष करने वाले मरीजों को अब थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब इमरजेंसी में एंबुलेंस से आने वाले मरीजों का हर हाल में उपचार करना ही होगा।I
Iदरअसल, दून अस्पताल में 19 और 20 दिसंबर को मरीजों के उपचार में लापरवाही सामने आई थी। 19 तारीख को एक मरीज को भर्ती होने के लिए 17 घंटे तक भटकना पड़ा था। अगले दिन एक मरीजों को इलाज के इंतजार में डेढ़ घंटे तक इमरजेंसी परिसर में एंबुलेंस में ऑक्सीजन मास्क लगाए बैठना पड़ा था। इसके बाद भी मरीज भर्ती नहीं हो पाया और उसकी मौत हो गई। इस पर अमर उजाला में दून अस्पताल की देहरी पर संवेदनाओं ने तोड़ा दम...इलाज न मिलने पर मरीज की मौत शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इन खबरों का शासन ने संज्ञान लेते हुए दून अस्पताल ही नहीं बल्कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों एवं राजकीय चिकित्सालय की इमरजेंसी की व्यवस्था में सुधार के लिए एसओपी जारी की है। इसके तहत अब मरीजों का दुर्घटना स्थल से प्राथमिक उपचार शुरू हो जाएगा। दून अस्पताल के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि अगर कोई एंबुलेंस मरीज को लेकर अस्पताल में प्रवेश करती है, तो उसमें सवार मरीज को आवश्यक रूप से उपचार दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी गार्डों और वार्ड बॉय की होगी।
I
I
I
I24 घंटे वार्ड बॉय रहेंगे तैनातI
Iउप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि दून अस्पताल की इमरजेंसी में स्ट्रेचर और व्हील चेयर रखने की जगह चिह्नित की गई है। यहां पर अब 24 घंटे वार्ड बॉय तैनात रहेंगे। जो मरीजों को खुद एंबुलेंस से अंदर लाएंगे।I
I
I
I
दून अस्पताल में हुई घटनाओं का लिया संज्ञान
I
Iआपात स्थिति में अगर किसी व्यक्ति को बेहतर प्राथमिक उपचार मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। पूर्व में दून अस्पताल में हुई घटनाओं का कड़ा संज्ञान लिया गया है। मरीजों की सभी परेशानी दूर करने के लिए सरकार की ओर से इमरजेंसी को लेकर पहली बार एसओपी जारी की गई है। इससे आपात स्वास्थ्य सेवाएं सुधरेंगी। - डॉ. आर राजेश कुमार, स्वास्थ्य सचिव, उत्तराखंडI