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Dehradun News: रायपुर सीएचसी में हर महीने 60 प्रसव, एसएनसीयू की सुविधा नहीं

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I10 बेड की सीएचसी में ओपीडी में इलाज के लिए आते हैं 300 मरीज
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Iगर्भवतियों का नहीं होता है लेवल-2 अल्ट्रासाउंड, जाना होता है निजी सेंटरI





दून के शहरी क्षेत्र में बनी रायपुर सीएचसी में मरीजों को सभी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। यहा अधिक संख्या में लोग इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन होते हुए भी गर्भवतियों को निजी सेंटर में अल्ट्रासाउंड के लिए जाना पड़ता है। गर्भवतियों को यह कहकर वापस कर दिया जाता है कि यहां लेवल-2 का अल्ट्रासाउंड नहीं होता है। सीएचसी में हर महीने में 60 प्रसव होते हैं, लेकिन नवजात के लिए सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) की सुविधा नहीं है।



जिले में दून अस्पताल, कोरोनेशन अस्पताल और प्रेम नगर अस्पताल के बाद रायपुर सीएचसी का नाम आता है। सीएचसी में रायपुर, राजपुर, मियांवाला, मोहकमपुर, सहस्त्रधारा, डोईवाला, मोथरोवाला, टिहरी आदि क्षेत्रों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। 10 बेड के साथ संचालित है, लेकिन रोजाना 300 मरीजों की ओपीडी होती है। इसके अलावा इमरजेंसी में भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल में बेड की संख्या कम होने की वजह से अन्य मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
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रायपुर सीएचसी के एमएस डॉ. पीएस रावत ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टरों के कुल सात पद हैं। अस्पताल में तीन एलएमओ, एक गाइनी, एक सर्जन, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक फिजिशियन, एक रेडियोलॉजिस्ट हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों का इलाज प्रभावित होता है। इसके अलावा नेत्र रोग विशेषज्ञ का पद नहीं है। सीएचसी में हमने 28 बेड डाल रखे हैं। इसके अलावा डेंगू मरीजों का इलाज भी किया जा रहा है।
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I- लेवल-2 अल्ट्रासाउंड के लिए जाना होता है निजी सेंटरI

अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ ने बताया कि एक महीने में करीब 50 से 60 प्रसव हो जाते हैं। इस दौरान कई नवजात ऐसे होते हैं जिन्हें एसएनसीयू में भर्ती करने की जरूरत होती है। यहां पर एसएनसीयू की सुविधा नहीं है। ऐसे में नवजातों को हायर सेंटर के लिए रेफर करना पड़ता है। एमएस डॉ. पीएस रावत ने बताया कि सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की मशीन नई टेक्नोलॉजी की नहीं है। मशीन में लेवल-2 के अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट सही नहीं आती है। इसलिए यहां पर लेवल-2 के अल्ट्रासाउंड बंद कर दिए गए हैं। यह अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था के 12 से 18 हफ्ते के बीच बच्चे की स्थिति जांचने के लिए किया जाता है।




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