राजधानी के ज्यादातर निजी अस्पताल नियमों को ठेंगा दिखाकर चल रहे हैं। लगभग हर दूसरे अस्पताल में बेसमेंट का इस्तेमाल पार्किंग के बजाय अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में किया जा रहा है। ज्यादातर अस्पतालों के बेसमेंट में दफ्तर और मरीजों के वार्ड तक बनाए गए हैं।
यह है नियम
बिल्डिंग बायलॉज के प्रावधानों के अनुसार बेसमेंट का इस्तेमाल पार्किंग के लिए किया जाना चाहिए। इसलिए बेसमेंट एरिया पर फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) नहीं गिना जाता है। इसका फायदा उठाते हुए तमाम निजी अस्पतालों ने बेसमेंट में ही दफ्तर, स्टोर और मरीजों के वार्ड तक खोले हुए हैं।
बायलॉज के अनुसार व्यावसायिक भवनों में बेसमेंट के अधिकतम 30 फीसदी हिस्से का अन्य गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें भी केवल एसी प्लांट रूम, इलेक्ट्रिक रूम ही बनाए जा सकते हैं। अस्पतालों को केवल पैथोलॉजी या एक्सरे रूम आदि बनाने की छूट है। बैंक के लिए स्वीकृत भवन में बेसमेंट में तिजोरी लगाई जा सकती है। शेष बचे 70 फीसदी हिस्से का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से पार्किंग के लिए ही किया जाना चाहिए।
देना होगा भारी जुर्माना
नियमों के खिलाफ बेसमेंट में दफ्तर चलाने वाले अस्पतालों को भारी जुर्माना देना होगा। पार्किंग से हटकर अन्य उपयोग में पूरे एरिया के एफएआर की गणना की जाएगी। इसके आधार पर ही संबंधित अस्पताल को जुर्माना देना होगा।
कार्रवाई की तैयारी
बेसमेंट का नियमों से इतर इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। ऐसे सभी निर्माणों को चिह्नित किया जाएगा। बेसमेंट का इस्तेमाल पार्किंग के लिए ही होना चाहिए।
-प्रकाश चंद्र दुमका, सचिव, एमडीडीए