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राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल में मरीज बेहाल

Thu, 18 Feb 2016 09:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला देहरादून
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राजधानी देहरादून के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों का हाल बेहाल है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के अधीन चल रहे दून अस्पताल में इन दिनों मरीज भटकने के लिए मजबूर हैं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए हो रहे बदलावों के चलते चारों तरफ अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं। खुद अस्पताल कर्मियों को तक पता नहीं कि कौन से चिकित्सक की ओपीडी कहां है।
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इसके चलते पर्याप्त चिकित्सक होने के बावजूद मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। दून अस्पताल और दून महिला अस्पताल को संयुक्त रूप से राजकीय दून मेडिकल कॉलेज का टीचिंग अस्पताल बनाया गया है। इसके लिए अब दोनों अस्पतालों की व्यवस्थाओं में बदलाव किया जा रहा है। एक तरफ मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों के अनुसार अस्पताल में पुनर्निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है, वहीं दूसरी ओर उसी अनुरूप प्रशासनिक व चिकित्सकीय व्यवस्थाएं भी बनाई जा रही है।

इसके चलते चिकित्सकों की ओपीडी में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां लगभग सभी चिकित्सकों की ओपीडी भूतल पर थी वहीं नई व्यवस्था के तहत ऑर्थो, मेडिसिन, ईएनटी व सर्जिकल ओपीडी भूतल पर, श्वास और चर्म रोग की ओपीडी पहले और नेत्र रोग की ओपीडी दूसरे तल पर की गई है। नई व्यवस्था के तहत अब चिकित्सकों की ओपीडी रोटेशन पर चल रही है। एक ही विभाग के अलग-अलग चिकित्सक ओपीडी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके चलते किसी खास डॉक्टर से उपचार कराने वाले मरीजों को भटकना पड़ रहा है।
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रजिस्ट्रेशन काउंटर पर भी भ्रम
अस्पताल में रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद अक्सर मरीज का कमरा नंबर भी पूछते हैं। पहले तो रजिस्ट्रेशन स्लिप पकड़ाते हुए कर्मचारी डॉक्टर का कमरा नंबर भी बताते थे लेकिन अभी फिलहाल उन्हें खुद ही इसकी जानकारी नहीं है। डॉक्टरों के कमरे लगातार बदले भी जा रहे हैं। इसलिए कर्मचारी मरीजों को जानकारी नहीं दे पा रहे हैं।

अस्पताल में सभी तरह की व्यवस्थाएं मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रावधानों के अनुसार की जा रही है। इसलिए ओपीडी समेत अन्य व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया है। शुरूआत में मरीजों को परेशानी है लेकिन धीरे-धीरे लोगों को इसका फायदा मिलने लगेगा।
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डा. केके टम्टा, चिकित्सा अधीक्षक
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