किसानों की हालत में सुधार के लिए बाबा रामदेव ने एक बड़ा ऐलान किया है। बाबा रामदेव की प्लानिंग अगर परवान चढ़ी तो इससे किसान मालामाल हो जाएंगे।
पतंजलि संस्थान उत्तराखंड के किसानों से एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कृषि उत्पादन खरीदेगा। यह घोषणा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ बैठक के दौरान बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने की।
बुधवार को मुख्यमंत्री आवास पर उत्तराखंड सरकार और पतंजलि के मध्य सहयोग कार्यक्रम पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इस परिचर्चा में मुख्य रूप से पांच क्षेत्रों में आपस में सहयोग करने पर सहमति बनी।
इन क्षेत्रों में उत्तराखंड को जैविक कृषि एवं जड़ीबूटी राज्य बनाना, राज्य के मोटे अनाज की व्यवसायिक खपत को बढ़ाना, राज्य में आयुष ग्रामों की स्थापना करना, एक विशाल गौधाम (गौशाला) की स्थापना करना और पर्यटन को बढ़ावा देना शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सभी क्षेत्र राज्य की समृद्धि और खुशहाली की दृष्टि से गेम चेंजर साबित होंगे। इनमें संभावनाओं पर अभी तक काफी विचार-विमर्श हुआ है, परन्तु अब कुछ करके दिखाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सरकार कडे़ और साहसिक फैसले लेने से नहीं हिचकेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे एक माह के अंदर सभी क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजना तैयार करें, जिसकी आज की बैठक से ठीक एक माह बाद समीक्षा की जाएगी। ठोस कार्ययोजना के आधार पर राज्य सरकार और पतंजलि के बीच आवश्यक समझौते भी किए जाएंगे।
उत्पादों के लिए बाईबैक सिस्टम
स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि संस्थान उत्तराखंड के किसानों को उनके उत्पादों के लिए प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने में सक्षम है। सिक्किम, जिसे हाल ही में ऑर्गेनिक स्टेट का दर्जा दिया गया है उससे कहीं अधिक भूभाग पर उत्तराखंड में ऑर्गेनिक खेती हो रही है।
पतंजलि राज्य के उत्पादों के लिए बाईबैक सिस्टम बना रहा है। 13 जिलों में 13 नये पर्यटन स्थल बनाने के लक्ष्य की सराहना करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि सभी नए पर्यटन स्थलों पर पतंजलि आयुष ग्राम की स्थापना में सहयोग देने को तैयार है।
राज्य सरकार के सहयोग से एक विशाल गौशाला की स्थापना करने की योजना है, जिसमें 40 से 60 लीटर दूध देने वाली गायों की नस्ल तैयार की जाएगी। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि की रिसर्च लैब और अन्य सुविधाओं को आयुर्वेद के शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए खोला जाएगा।
पतंजलि के 300 से अधिक वनस्पति विज्ञानी राज्य की एक-एक जड़ी-बूटी और पौधे का सर्वेक्षण कर उनका डॉक्यूमेंटेशन कर सकते हैं। राज्य में होने वाले 5 हजार कुंतल ऊन को पतंजलि द्वारा खरीदने पर भी सैद्धांतिक सहमति व्यक्त की गई।
उन्होंने गोपेश्वर में स्थित जड़ी बूटी शोध संस्थान द्वारा उत्पादित किए जाने वाली सभी जड़ीबूटियों को खरीदने की सहमति भी दी। आयुष एवं वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने योग एवं आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भों में स्थापित करते हुए इनके माध्यम से रोजगार सृजन पर बल दिया। बैठक में मुख्य सचिव एस. रामास्वामी, अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश और डॉ. रणवीर सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
आंचल डेयरी को लेकर दिया प्रस्ताव
सचिव पशुपालन आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने पतंजलि को अमूल के साथ किए समझौते की तर्ज पर उत्तराखंड की आंचल डेयरी के साथ भी पशुओं के चारे के लिए समझौता करने का प्रस्ताव दिया।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आंचल डेयरी के नेटवर्क का प्रयोग गोमूत्र कलेक्शन के लिए भी किया जा सकता है, जिसे पतंजलि द्वारा खरीदा जाए। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने कहा कि राज्य जैव विविधता बोर्ड पतंजलि के सहयोग से यहां की जैवविविधता का वर्गीकरण कर सकता है।
आयुर्वेद विश्वविद्यालय द्वारा अपने शोधार्थियों के लिए पतंजलि की रिसर्च लैब का प्रयोग करने की मांग की गई। यह भी सुझाव आया कि जिन गांवों को आयुष ग्रामों के रूप में चयनित किया जाए, वहां के लोगों को योग और नैचुरोपैथी में डिप्लोमा कोर्स कराया जाए। उत्तराखण्ड की लेमन ग्रास, सेंट्रेन ला, कैमोमाइल जैसे ऐरोमेटिक पौधों के उपयोग पर भी चर्चा हुई।
पहाड़ों का पानी, जवानी और जंगल सभी के बेहतर उपयोग के संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा हुई। यहां कृषि, आयुर्वेद, पहाडों के विकास करने के साथ ही पलायन रोकने के लिए पतंजलि संस्थान काम करेगा। आयुष शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रिसर्च लैब के साथ ही अन्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
आचार्य बालकृष्ण, पतंजलि संस्थान