इस क्रम में बीते 19 अक्तूबर को उन्होंने हिमालय में छुपी वनस्पतियों और जड़ी बूटियों की खोज करने के लिए पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण से मुलाकात की थी, जिसमें आचार्य बालकृष्ण ने अभियान से जुड़ने पर सहमति देने के साथ ही स्वयं भी इसका हिस्सा बनने की इच्छा जताई है।
इसके तहत जल्द ही एमओयू साइन करने की तैयारी की जा रही है। अभियान के पहले चरण में निम द्वारा पतंजलि के वनस्पति वैज्ञानिकों को पर्वतारोहण का बेसिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद दोनों संस्थानों का संयुक्त दल अगले वर्ष मई-जून में गंगोत्री हिमालय के रक्तवन क्षेत्र से अपने अभियान की शुरूआत करेगा।