यह देख सभी यात्री दहशत में आ गए और बच्चे और महिलाएं चीखने लगी। विमान पंतनगर से थोड़ा ही दूर गया था, लिहाजा उसे वापस पंतनगर में उतारा गया। विमान के लैंड होने तक दरवाजा खुला था और दरवाजा बंद करने में उन्होंने को-पायलट की मदद की थी।
इसके बाद विमान को सुरक्षित रनवे पर उतारा गया। डॉ. बोरा ने बताया कि अगर दरवाजे के सामने वाली सीट पर कोई यात्री बैठा होता तो वह नीचे गिर सकता था। इधर पिथौरागढ़ निवासी और व्यापारी पंकज चंद ने बताया कि वह पत्नी अमिषा, आठ साल के बच्चे अर्णव के साथ विमान में थे।
विमान में पिथौरागढ़ विद्युत विभाग में तैनात मुकेश सिंह, उनकी पत्नी ममता के अलावा कुल आठ यात्री थे। मुकेश सिंह ने बताया कि दस मिनट तक यात्रियों की जान सांसत में रही।
डर के मारे सभी का बुरा हाल था। पिथौरागढ़ के लिए लाइफलाइन शुरू हुई है। लेकिन कंपनी को यात्रियों की सुरक्षा का विशेष ख्याल रखना चाहिए। उड़ान के दौरान आसमान में हुई दरवाजा खुलने की घटना से यात्री बेहद सन्न हैं। उनका कहना है कि अचानक हुई घटना सभी के जेहन में बस गई।
घटना को याद करते ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। डॉ. लोकेश और पंकज के मुताबिक यह घटना अप्रत्याशित थी। गनीमत यह रही कि किसी यात्री को कोई नुकसान नहीं हुआ। अब कंपनी के अधिकारी दरवाजा खुलने की बात को क्यों नकार रहे, यह तो वही जानें। लेकिन यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरी होनी चाहिए।