उप जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए दवा वितरण और मेडिकल अफसरों के नए कक्ष तो तैयार कर दिए गए हैं, लेकिन काउंटरों के बाहर वाहनों की बढ़ती पार्किंग ने परेशानी बढ़ा दी है। पंजीकरण, जांच शुल्क और पैथोलॉजी के काउंटरों के सामने मरीजों और तीमारदारों को खड़े होने की जगह तक नहीं मिल पा रही है।
अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 650 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या में मरीजों के साथ तीमारदार भी आते हैं। पंजीकरण, जांच शुल्क और पैथोलॉजी लैब से संबंधित काउंटर अस्पताल भवन के बाहर संचालित हो रहे हैं। ऐसे में इन काउंटरों के सामने मरीजों और तीमारदारों की भीड़ लगी रहती है।
दूसरी ओर अस्पताल परिसर में पार्किंग की व्यवस्था होने के बावजूद कई लोग अपने वाहन काउंटरों के आसपास ही खड़े कर रहे हैं। इससे काउंटरों के सामने उपलब्ध खुली जगह लगातार कम होती जा रही है। कई बार मरीजों और तीमारदारों को वाहनों के बीच से होकर काउंटर तक पहुंचना पड़ता है। बुजुर्ग, दिव्यांग और गंभीर मरीजों को इससे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में नए कक्ष बनने के बाद परिसर में मरीजों के आवागमन के लिए उपलब्ध जगह और सीमित हो गई है। यदि काउंटरों के सामने वाहनों की पार्किंग पर रोक लगाने और पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में समस्या और बढ़ सकती है।
पार्किंग के लिए अस्पताल परिसर में व्यवस्था है। वाहनों को निर्धारित स्थान पर खड़ा कराने और आवागमन सुचारु रखने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी। - डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक।