प्राइवेट स्कूलों की तीन महीने की फीस माफ करने की मांग को लेकर नेशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट राइट ने हाईकोर्ट में ऑनलाइन जनहित याचिका दायर की है। वहीं आम आदमी पार्टी ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
नेशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट राइट के अध्यक्ष आरिफ खान और महासचिव अधिवक्ता सुदेश उनियाल के अनुसार लॉकडाउन की वजह से बड़ी संख्या में लोगों के सामने आर्थिक संकट है। कई कामगार अभिभावकों को वेतन भी नहीं मिला है। ऐसे में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों पर स्कूल प्रबंधन फीस जमा करने और कॉपी-किताबें खरीदने पर दबाव बना रहे हैं। कई स्कूल ट्यूशन, ट्रांसपोर्टेशन, डेवलपमेंट फीस भी वसूल रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है। इस बाबत मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर निजी स्कूलों की तीन माह की फीस माफ करने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार ने इस मामले में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया। इसके चलते अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। उम्मीद है कि कोर्ट इस मामले का संज्ञान लेकर अभिभावकों के पक्ष में फैसला देगी।
वहीं आम आदमी पार्टी ने निजी स्कूलों द्वारा फीस वसूली को लेकर सरकार की ओर से जारी आदेश पर सवाल खड़े किए हैं। आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता रविंद्र सिंह आनंद का कहना है कि जब स्कूल कॉलेजों में पढ़ाई ही बंद है तो फीस वसूलने का कोई औचित्य नहीं है। सरकार ने पहले फीस जमा करने का दबाव न बनाने का आदेश निजी स्कूलों को दिया था, लेकिन अब राज्य सरकार फीस वसूली के मामले में दोहरा मापदंड अपना रही है।
सरकार के नए आदेश के मुताबिक जो अभिभावक फीस जमा कराना चाहते हैं वे फीस जमा कर सकते हैं और जो समर्थ नहीं है वे फीस ना जमा करें। रविंद्र सिंह आनंद का आरोप है कि ऐसा सरकार ने निजी स्कूल प्रबंधन के दबाव में आकर किया है। वहीं संगठन प्रभारी डीके पाल का कहना है कि लॉकडाउन में स्कूल-कॉलेज समेत तमाम शैक्षणिक संस्थान बंद हैं ऐसे में छात्रों से फीस वसूली की बात बेमानी है। आम आदमी पार्टी छात्रों व अभिभावकों के साथ है। निजी स्कूलों की मनमानी चलने नहीं दी जाएगी। यदि सरकार ने आदेश वापस नहीं लिया तो सड़कों पर उतर कर आंदोलन किया जाएगा।