अर्द्धसेना बलों (बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसफ और असम राइफल्स) के रिटायर्ड कार्मिकों को सेना की भांति एक्स सर्विसमैन स्टेट्स देने पर उत्तराखंड सरकार की मंशा सवालों के घेरे में हैं।
पूर्व एवं कार्यरत अर्द्धसैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए मंत्रिमंडल स्तर से फैसले लेने के बाद शासनादेश तक जारी किया गया, लेकिन उसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में है। अर्द्धसैनिक बलों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अर्द्धसेना बलों को लाभ देने के लिए कौन सा विभाग जिम्मेदार है।
कहने भर के लिए एक अर्द्धसैनिक कल्याण परिषद का गठन किया, लेकिन न तो परिषद का कार्यक्षेत्र पूरी तरह से परिभाषित है न ही उसका ढांचा गठित हुआ है। दो मंडल कार्यालय और एक मुख्यालय की बात हुई, लेकिन न तो उसके लिए भूमि आवंटित है न ही किसी स्तर पर उसके गठन के लिए आदेश जारी हुए हैं।
अभी तक सरकार अर्द्धसैनिक बलों के कल्याण के नाम पर परिषद के अध्यक्ष पर सियासी ताजपोशी कर पाई है। इन सभी सवालों से परेशान प्रदेश के एक लाख से अधिक अर्द्धसैनिक बलों के रिटायर कार्मिक अब मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहे हैं।
पूर्व केंद्रीय सशस्त्र बल कार्मिक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व आईजी एसएस कोठियाल ने बताया कि सरकार अर्द्धसैनिकों की लगातार अनदेखी कर रही है। कैबिनेट के फैसले और शासनादेश होने के बावजूद हमें लाभ नहीं मिल रहे हैं। सीएम को पत्र लिखकर अपने मांगे रखी हैं।
सेना के भांति पुलिस वीरता पदकों के लिए एक मुश्त एवं वार्षिक राशि अनुमन्य नहीं हुई न ही अन्य कल्याण योजनाएं शुरू हुई। 12 जून को हमारी बैठक है, जिसमें अपनी लंबित मांगों को पूरा करवाने पर रणनीति बनाई जाएगी।
पुलिस गेलैंट्री मेडल धारकों को नहीं मिला लाभ
संगठन ने पुलिस गैलेंट्री मेंडल एवं विशेष सेवाओं के पदक प्राप्त कार्मिकों को सेना के वीरता पदक (परमवीर, महावीर, वीरता, सेना मेडल आदि) धारकों के सामान एक मुश्त एवं वार्षिक राशि देने के आदेश पर अमल नहीं होने पर सर्वाधिक आपत्ति जताई है।
शासनादेश में इसका प्रावधान किया गया, लेकिन उसपर अमल नहीं हुआ है। अर्द्धसैनिक बलों के गेलेंट्री पुलिस पदकों के वर्गीकरण सहित उसके लिए अनुमन्य राशि निर्धारित करने की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी है।
शासनादेश तो है पर अमल कैसे हो
केंद्र के 2012 के एक्ट पर राज्य मंत्रिमंडल 28 जनवरी 2014 को पूर्व अर्द्धसैनिक बल के कार्मिकों को पूर्वसैनिकों की भांति लाभ देने का फैसला लिया, जिसका 8 फरवरी को शासनादेश जारी हुआ।
शासनादेश सैनिक कल्याण विभाग के लिए जारी हुआ, लेकिन उसके बाद एक अर्द्धसैनिक कल्याण परिषद का गठन कर सैनिक कल्याण विभाग से अलग कर दिया। अर्द्धसैनिक कल्याण का जिम्मा सैनिक कल्याण मंत्री को नहीं दिया गया।