विजिलेंस ने जनवरी 2020 में मुकदमा दर्ज कराया
सेटिंग वाले अभ्यर्थियों के ओएमआर शीट में गोले काले कर दिए गए। इससे वह टॉपर बन बैठे। इसके बाद जांच विजिलेंस को सौंप दी गई। विजिलेंस ने जनवरी 2020 में मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन मुकदमे में प्राथमिक तौर पर कोई आरोपी नहीं बनाया गया था। इस मामले की ढाई साल से भी अधिक समय से जांच चल रही थी। अभी पिछले दिनों विजिलेंस ने कहा था कि जल्द ही गिरफ्तारियां की जाएंगी, पर एसटीएफ एक के बाद एक खुलासे कर रही थी। इसके बाद सीएम ने विजिलेंस से जांच को हटाकर एसटीएफ से कराने को कहा।
बहुत से साक्ष्य हो गए नष्ट
विजिलेंस अफसरों ने बताया था कि छह साल पहले परीक्षा हुई थी। ऐसे में कई साक्ष्य तो नष्ट भी हो गए। इनमें कॉल डिटेल को बड़ा साक्ष्य माना जाता है, लेकिन इतनी पुरानी कॉल डिटेल भी अब नहीं निकल पाई हैं। इसके अलावा तमाम इस तरह के साक्ष्य हैं जो आयोग ने मांगने पर भी मुहैया नहीं कराए हैं। यही नहीं उस वक्त के कई अधिकारी और कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। ओएमआर शीट का मिलान करना भी बेहद मुश्किल रहा है।
ये भी पढ़ें...उत्तराखंड में बड़ा हादसा: किच्छा के पास श्रद्धालुओं से भरी ट्रॉली पलटने से आठ की मौत, 37 लोग घायल, तस्वीरें
आयोग की दो भर्तियों की जांच में एसटीएफ ने बेहतरीन काम किया है। मास्टरमाइंड राजेश चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य की गिरफ्तारियों के लिए जांच जारी है। अब पूर्व में आयोजित कनिष्ठ सहायक ज्यूडिशियरी और वीडीओ 2016 की भर्ती जांच पर भी फोकस करने के निर्देश दिए गए हैं। सीएम के निर्देश पर वीडीओ भर्ती जांच भी एसटीएफ को ट्रांसफर कर दी गई है। -अशोक कुमार, डीजीपी