शोध टीम के टीम लीडर डॉ. शिव कुमार ने बताया कि उत्तरा फाउल गहरे काले रंग की है। इसके पैरों पर भी पंख होते हैं। सिर पर पंखों का गुच्छा (क्राउन) होता है, जो चोटीनुमा होता है। कुछ स्थानीय क्षेत्रों में इसे डोटियाल, बुलबुल, ताज मुर्गी के नाम से भी जाना जाता है।
उत्तरा फाउल कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों, पहाड़ी एवं ठंडे क्षेत्रों में रहने के लिए अनुकूल है। उत्तरा फाउल में अंडों से चूजे निकालने और छोटे चूजों की देखभाल करने के आनुवांशिक लक्षण विद्यमान हैं।
शैक्षणिक कुक्कुट फार्म के सह निदेशक डॉ. अनिल यादव ने बताया कि वर्तमान में फार्म पर दो हजार से ज्यादा उत्तरा नस्ल के पक्षी हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी मांग बैक यार्ड फार्मिंग में बढ़ रही है।
शैक्षणिक कुक्कुट फार्म के सहायक निदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. राजीव रंजन कुमार ने बताया कि इस प्रजाति के कुक्कुटों में रोग-प्रतिरोधक क्षमता अन्य नस्लों की तुलना में अधिक होती है।