प्राध्यापक डॉ. एमजीएच जैदी ने बताया कि सबसे पहले हमने ऐसे प्लास्टिक पदार्थ चुने, जो मानवीय प्रयोग में हानिकारक न हों और जिनका जैव विघटन संभव हो। इन प्लास्टिक पदार्थों में जीवाणु नाशक नैनो पार्टिकल्स को मिलाया और तरल कार्बन डाई ऑक्साइड (हरित रसायन तकनीक) द्वारा जीवाणुरोधक नैनो पार्टिकल्स को अविषाक्त प्लास्टिक पदार्थों में संयोजित कर दिया।
इससे जो नैनो सबमिश्रण प्राप्त हुए, उसका उपयोग एंटी माइक्रोबियल (जीवाणुरोधी) प्लास्टिक बनाने में किया गया। विकसित नैनो सबमिश्रित प्लास्टिक विभिन्न प्रकार के घरेलू तथा चिकित्सीय उत्पादों के निर्माण और संरक्षण में वरदान साबित होंगे।
वर्तमान में जीवाणुरोधक प्लास्टिक का निर्माण विषैले कार्बनिक विलायकों की उपस्थिति में किया जाता है। इनके उपयोग से बनने वाले प्लास्टिक पदार्थों में विषाक्तता मौजूद रहती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। नैनो सबमिश्रण के निर्माण में जो भी प्लास्टिक पदार्थ व नैनो पार्टिकल्स प्रयोग किए गए, वह मानव हितैषी हैं। इसमें किसी भी प्रकार के कार्बनिक विलायकों का प्रयोग न करते हुए हरित विलायकों का प्रयोग किया गया है।
-डॉ. एमजीएच जैदी, प्राध्यापक रसायन विज्ञान पंतनगर विवि