यदि आप को लगता है कि मुसीबत की घड़ी में टैक्सी या बस में लगा लाल रंग का पैनिक बटन आपके लिए सुरक्षा कवच साबित होगा तो आप गलत हैं। विभाग ने महिला यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर वाहनों में यह बटन लगवा तो दिए हैं, लेकिन अभी तक सॉफ्टवेयर पर इन वाहनों का डाटा ही अपलोड नहीं हुआ है। ऐसे में पैनिक बटन दबाने के बावजूद पुलिस तक सूचना पहुंचेगी ही नहीं। ऐसे में इस बटन पर भरोसा करना जोखिम भरा साबित होगा। ज्यादा अच्छा होगा मुसीबत के समय आप शोर मचाकर मदद मांगें।
परिवहन विभाग ने यात्री वाहनों में पैनिक बटन और जीपीएस अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन खुद इस पर होमवर्क नहीं किया। यही कारण है कि 40 दिन बाद भी पैनिक बटन और जीपीएस लगे वाहनों का डाटा सॉफ्टवेयर में अपलोड नहीं हो सका है। इसमें कम से कम एक महीने का वक्त और लगने की उम्मीद है। बता दें कि छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न जैसी घटनाएं रोकने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने यात्री वाहनों के पंजीयन के समय ही पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम लगाने की अनिवार्यता लागू की है। इसके तहत बसों, टैक्सी, मैक्सी आदि सार्वजनिक यात्री सेवा के वाहनों में दोनों उपकरण नहीं होने पर उनका पंजीयन नहीं होगा।
दाम पूरा, काम अधूरा
यात्री वाहनों में पैनिक बटन और जीपीएस लगाने के आदेश जारी कर परिवहन विभाग इसके प्रति सख्ती दिखा रहा है। ऐसे में रोजाना करीब तीन से चार यात्री वाहनों में पंजीयन के समय पैनिक बटन, जीपीएस लगवाए जा रहे हैं। इसके लिए कंपनियां सात से 10 हजार रुपये वसूल रही हैं। लेकिन परिवहन और पुलिस विभाग मिलकर इसका संयुक्त कंट्रोल रूम नहीं बना पाए हैं।
ऐसे काम करेगा पैनिक बटन
- लाल रंग का बटन होगा, जो यात्री वाहनों में चार जगह लगेगा।
- पांच सीटर टैक्सी कैब में यह चालक सीट के पीछे लगेगा।
- खतरा महसूस होने पर यह बटन दबाया जा सकेगा।
- बटन दबाते ही सॉफ्टवेयर पर मैसेज जाएगा।
- सॉफ्टवेयर से पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना पहुंचेगी।
- पैनिक बटन वाले वाहन सॉफ्टवेयर से जुड़े होंगे।
- संबंधित वाहन की लोकेशन व मालिक की पूरी सूचना सॉफ्टवेयर से मिल जाएगी।
- पैनिक बटन वीक ट्रैकिंग सिस्टम से भी जुड़ा होगा।
- सूचनाएं जुटाकर तत्काल नजदीकी थाना पुलिस मदद के लिए पहुंचेगी।
आरटीओ में बगैर पैनिक बटन और जीपीएस वाले यात्री वाहनों का पंजीयन नहीं किया जा रहा है। मौजूदा समय में पैनिक बटन लगे तीन से चार यात्री वाहनों का रोजाना पंजीयन हो रहा है। सॉफ्टवेयर में डाटा अपलोड होते ही इसका लाभ मिलेगा।
- अरविंद पांडेय, एआरटीओ
एनआईसी की ओर से सॉफ्टवेयर तैयार कर दिया गया है। सभी आरटीओ से एक जनवरी से अब तक पैनिक बटन लगे यात्री वाहनों के पंजीयन का डाटा मांगा गया है। डाटा एकत्र होने के बाद ही सॉफ्टवेयर काम करना शुरू करेगा।
- शैलेश बगौली, सचिव परिवहन