श्री कालिका माता समिति में चल रही पाक्षिक कथा के अंतिम दिन पंडित देवेंद्र उपाध्याय शास्त्री ने सुदामा का पावन चरित सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। पंडित उपाध्याय ने बताया कि भगवान के सबसे प्रिय साथी सुदामा ब्राह्मण थे।
श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम था वह प्रसन्न मुद्रा में जीवन यापन करने वाले श्रेष्ठ ब्राह्मण थे उनकी पत्नी का नाम सुशीला था। सुशीला के कहने पर सुदामा द्वारकाधीश के दर्शन करने द्वारका गए। जिसके परिणाम स्वरूप भगवान ने उनकी दरिद्रता को दूर कर दिया और उन्हें संपन्न ब्राह्मण बना दिया। सुखदेवजी ने राजा परीक्षित को अंतिम उपदेश में कहा कि तुम मरोगे। राजा बोला कि शरीर ने जन्म दिया शरीर मिटेगा पर मैं आपकी कृपा से सिद्ध हो गया हूं। यह सुनकर सुखदेव जी प्रसन्न हो गए और अंतर्धान हो गए। भागवत का सार 12 स्कंद 335 अध्याय और 18000 श्लोक हैं। नाम संकीर्तन ही सर्वोपरि महिमा है। कल कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंदिर प्रांगण में आचार्य चंद्र प्रकाश ममगई की ओर से मां कालिका यज्ञशाला में दैनिक हवन के साथ के साथ 15वां अध्याय गीता व विष्णु सहस्रनाम की आहुतियां दी जाएंगी। इस अवसर पर ट्रस्टी गगन सेठी, रमेश साहनी, दयाल धवन, जय किशन कक्कर, नरेश मैनी अशोक लांभा मौजूद रहे।