शहरभर में स्थित दुर्गा पंडालों से सोमवार को देवी की विदाई हो जाएगी। सुबह देवी की विशेष पूजा-अर्चना के साथ ही सिंदूर खेला जाएगा।
सुहागिन महिलाएं देवी संग सिंदूर खेल, उनकी विदाई करेंगीं। सभी जगह से मूर्तियां अलग-अलग नदियों में प्रवाहित की जाएंगी।
विशेष पूजा-अर्चना होगी
सोमवार को ढाकियों की धुन के बीच सुबह से ही देवी की विशेष पूजा-अर्चना होगी। पांच दिनों की पूजा के बाद देवी की मूर्ति को विसर्जन के लिए ले जाया जाएगा। इससे पहले रविवार को सभी जगह नवमी पूजन हुआ।
देवी को विशेष भोग लगाया गया एवं कुमारी पूजन किया गया। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। बंगाली लाइब्रेरी में हिंदी नाटक ‘गोल्ड-मेडल’ का मंचन किया गया। बंगाली लाइब्रेरी में पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन के लिए माल देवता ले जाई जाएगी।
मूर्ति सौंग नदी ले जाई जाएगी
रायपुर ओएलफ में हो रहे दुर्गा पूजन से देवी की मूर्ति सौंग नदी ले जाई जाएगी। आराघर में हो रहे पंडाल से देवी की मूर्ति को विसर्जन के लिए हरिद्वार ले जाया जाएगा। दुर्गाबाड़ी, आराघर, रायपुर, कांवली रोड सभी जगह कन्या पूजन आदि कार्यक्रम किए गए।