भारत-नेपाल के बीच 18 साल से उलझी पंचेश्वर बहुउद्देशीय जल विद्युत परियोजना अब जमीन पर उतरेगी। एक ओर इस परियोजना को भी टिहरी बांध की तर्ज पर रॉक फिल मैथेड से बनाने की तैयारी है।
वहीं टिहरी बांध का विरोध जताने वाले भू-वैज्ञानिक और पर्यावरणविद् एक बार फिर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। टिहरी बांध के निर्माण में जो खामियां सामने आई थीं केंद्र और राज्य सरकार ने उससे सबक जरूर लिया है लेकिन 5,600 मेगावाट उत्पादन वाली इस बिजली परियोजना को लेकर अतिरिक्त सतर्कता भी बरतनी होगी।
आंकड़ों को देखें तो बांध के आसपास के दस किलोमीटर के दायरे में 1992 से 2006 के बीच 5 रियेक्टर स्केल के दस भूकंप आ चुके हैं। ऐसे में अतिसंवेदनशील इलाके में बांध निर्माण भी चुनौती भरा होगा।
उत्तराखंड के साठ गांवों की आबादी होगी प्रभावित
पंचेश्वर बांध की परिधि में उत्तराखंड के साठ गांवों की करीब 25 हजार आबादी आएगी। इनमें कुमाऊं के तीन जिले पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और चंपावत के गांव शामिल हैं। जबकि नेपाल की 14 ग्राम समितियां बांध निर्माण से प्रभावित होंगी।
परियोजना के तहत करीब 120 वर्ग किलोमीटर डूब क्षेत्र उत्तराखंड में आएगा। परियोजना में 80 किलोमीटर का जलाशय होगा। जबकि टिहरी में 42 किलोमीटर का है। ऐसे में जलाशय की मजबूती और पानी के रिसाव के खतरे से निपटना होगा। परियोजना में आठ टनल बनाए जाएंगे।
पंचेश्वर से जुड़ा पूरा प्रोजेक्ट दस साल में तैयार होगा। इसमें पंचेश्वर बांध सात साल में तैयार हो जाएगा। इसके मुख्य बांध की ऊंचाई 315 मीटर होगी।
इस परियोजनपा से 13, 384 वर्ग किलोमीटर एरिया को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इसमें दो पावर हाउस बनने हैं। 28 सौ मेगावाट का एक पॉवर हाउस नेपाल की सीमा और एक उत्तराखंड की सीमा में होगा।
उत्तराखंड ने मांगा हिस्से में 13 प्रतिशत शेयर
इस परियोजना को लेकर पंचेश्वर डेवलेपमेंट अथॉर्टी बनाई जाएगी। जिसका कार्यालय उत्तराखंड में होगा उत्तराखंड के ऊर्जा सचिव इसके स्थाई सदस्य होंगे। बांध की इक्नॉमिक लाइफ 35 साल बताई जा रही है।
जबकि सिंचाई के लिहाज से यह 50 साल तक काम करेगा। परियोजना में ऊर्जा उत्पादन की लागत 2.26 पैसे प्रति यूनिट होगी और 2.64 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मुहैया कराई जाएगी।
पंचेश्वर बांध परियोजना में अपनी हिस्सेदारी को लेकर उत्तराखंड सरकार अभी से सजग हो गई है। मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि परियोजना का बड़ा हिस्सा उत्तराखंड में हैं इसलिए हमारी हिस्सेदारी भी अधिक होनी चाहिए।
सीएम ने जलसंसाधन मंत्री उमाभारती को भेजे पत्र में कहा कि इस परियोजना में देश को जितनी हिस्सेदारी मिले उसका 13 फीसदी हिस्सा उत्तराखंड को दिया जाए। सीएम ने केंद्रीय मंत्री का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा जलमग्न होगा।
टिहरी बांध में पुनर्वास और विस्थापन को लेकर जो दिक्कतें आ रही हैं। पंचेश्वर में ऐसी दिक्कतें न आए इसके लिए केंद्र उन्हें बसाने में बढ़चढ़ कर भूमिका निभानी होगी। बांध से प्रभावित परिवारों को नौकरी, उनके स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा के साथ सड़क-पुल आदि का लाभ भी उन्हें मिले।