फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंचायत राज संशोधन बिल में कमियों उठने लगे विरोध के सुर, जनाधिकार मंच ने सरकार को दिया सुझाव

Mon, 08 Jul 2019 09:50 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

पंचायत राज संशोधन बिल-2019 की कमियों को लेकर हर रोज मांग उठ रही है। इस मामले में हाल ही में अस्तित्व में आए पंचायत जनाधिकार मंच के पदाधिकारियों ने सोमवार को सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात की।

विज्ञापन


मंच के पदाधिकारियों ने साफ किया कि बिल का विरोध उनका मकसद नहीं है, बल्कि वे इसमें न्यायोचित सुधार चाहते हैं। मंच के अनुसार, सीएम ने इस संबंध में विचार करने का भरोसा दिलाया है।

पंचायत राज संशोधन बिल-2019 को सरकार ने हाल ही विधानसभा में पारित कराया है। यह बिल अब राजभवन में है, जिस पर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। सबसे बड़ा मसला बिल में दो बच्चों की शर्त से जुड़ा है। इसमें कोई कट ऑफ डेट नहीं है। यह बिल इसी रूप में एक्ट बनता है, तो फिर जिस दिन से अधिसूचना होगी, उसी दिन से दो से ज्यादा बच्चे वाले दावेदार पंचायत चुनाव से बाहर हो जाएंगे।
विज्ञापन


यानी अधिसूचना से पहले से जिन दावेदारों के तीन या उससे ज्यादा बच्चे हैं, वे भी चुनाव के अयोग्य होंगे। पंचायत जन अधिकार मंच के पदाधिकारियों ने इस कमी की ओर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने शैक्षिक योग्यता निर्धारण में ओबीसी का कोई जिक्र न होने को भी बड़ी कमी बताया और कहा कि इस आधार पर तो ओबीसी उम्मीदवार यदि निरक्षर होगा, तो भी चुनाव के योग्य होगा।

मंच के पदाधिकारियों ने मांगों के संबंध में सीएम को ज्ञापन भी सौंपा। पदाधिकारियों के अनुसार, सीएम ने सुझावों पर सहमति प्रकट की है और इस संबंध में विचार करने का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधिमंडल में मंच के संयोजक जोत सिंह बिष्ट, मथुरा दत्त जोशी, अश्विन बहुगुणा, जगमोहन रौथाण, महेश ढौंडियाल शामिल थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें