दो बच्चों से अधिक बच्चों वाले प्रत्याशियों को चुनाव में प्रतिबंधित करने के नए पंचायती राज एक्ट के प्रावधान को कोटाबाग निवासी मनोहर लाल, पूर्व ब्लॉक प्रमुख जोत सिंह बिष्ट समेत कई कांग्रेस नेताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि सरकार इस संशोधन को बैकडेट से लागू कर रही है, जबकि ऐसा कोई प्रावधान लागू किए जाने पर तीन सौ दिन का ग्रेस पीरियड दिया जाता है, जो इस मामले में नहीं दिया गया।
याचिकाओं में कहा गया था कि एक ओर जहां को-ऑपरेटिव सोसायटी सदस्य दो से अधिक बच्चे होने की वजह से चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, वहीं गांव में प्रत्येक प्रत्याशी किसी ना किसी को-ऑपरेटिव सोसायटी का सदस्य है। वहीं, कोर्ट ने अपने निर्णय में माना कि दो बच्चों संबंधी प्रावधान परिवार कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने इस एक्ट में पंचायत प्रतिनिधियों के पदों के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल पास होने को भी चुनौती दी थी। अपने निर्णय में कोर्ट ने शैक्षिक योग्यता के संबंध में किए गए प्रावधान पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अधिवक्ताओं के अनुसार इसका निहितार्थ है कि शैक्षिक योग्यता को लेकर एक्ट में किया गया प्रावधान प्रभावी माना जाएगा।