उत्तराखंड में नए परिसीमन पर चुनाव कराने को लेकर बुरी तरह उलझे शासन ने बृहस्पतिवार को आरक्षण पर देर रात रोक भी लगा दी। सचिव ने इसके आदेश भी जारी किए।
उधर, राज्य निर्वाचन आयोग ने भी शासन से नए परिसीमन पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। शासन को अब तीन दिसंबर तक हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करना है और इसी के चलते फिलहाल चुनाव प्रक्रिया भी रोक दी गई है।
स्थिति स्पष्ट करने को कहा
हाईकोर्ट ने पहले सरकार से पहले कहा था कि नए परिसीमन पर ही चुनाव कराए जाएं। अब कोर्ट ने मंगलवार तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
कोर्ट के इस आदेश के बाद शासन ने बृहस्पतिवार देर रात आरक्षण पर भी रोक लगा दी। सचिव पंचायती राज विनोद फोनिया ने इसकेआदेश जारी किए। दूसरी तरफ, राज्य निर्वाचन आयोग ने भी शासन से नए परिसीमन पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
आयोग की परेशानी यह है कि नए सिरे से परिसीमन होता है तो मतदाता सूची में भी फेरबदल होगा। इस काम में कम से कम दो माह का समय लगना तय है। चुनाव कार्यक्रम आयोग को तैयार करना है लिहाजा नए कार्यक्रम को लेकर भी आयोग को मशक्कत करनी होगी।
शासन ने नए परिसीमन पर अभी तक कोई फैसला नही किया है। सूत्रों का कहना है कि अधिक संभावना यही है कि चुनाव अब नए परिसीमन पर ही करवाना होगा।
ऐसे में पंचायत चुनाव के टलने के आसार अधिक हैं। पर बृहस्पतिवार को कोर्ट ने शासन की परेशानी में और इजाफा कर दिया।
कोर्ट ने साफ तौर पर पूरा चुनाव कार्यक्रम को समयबद्ध करने को कह दिया है। शासन ने आरक्षण की प्रक्रिया को भी रोक दिया है। सचिव के मुताबिक नए परिसीमन पर स्थिति स्पष्ट होने पर ही आरक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।
जिला पंचायतों में सभी आपत्तियां खारिज
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आरक्षण के लिए शासन को चार जिलों से आपत्तियां मिली थी। इन चारों जिलों की आपत्तियों को शासन ने खारिज कर दिया है। अपर सचिव पंचायत राज सीएस नपलचयाल ने इसकी पुष्टि की। जिला पंचायत में अध्यक्ष पद पर आरक्षण शुक्रवार को फाइनल किया जाना था पर इस पर रोक लगा दी गई।