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बेहद खौफनाक है पाक में हिंदू महिला होना

Mon, 30 Jun 2014 03:27 PM IST
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, हरिद्वार
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पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों से आए हिंदू नागरिकों के दल ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं के साथ होने वाली अत्याचार के बारे में बताया।
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उन्होंने अपनी तकलीफें बताईं और शंकराचार्य से भारतीय नागरिकता दिलाने में मदद की गुहार लगाई।

इस दल ने बताया कि पाकिस्तान में उनके पास मौलिक अधिकार तक नहीं हैं। बहू-बेटियों को जबरन उठाकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है।

हिंदुओं को अपने धार्मिक संस्कारों का पालन नहीं करने दिया जाता है। यहां तक कि हिंदू परंपरा के मुताबिक शव का दाह संस्कार भी नहीं करने दिया जाता है।

अब पाकिस्तान नहीं लौटना...

इनका कहना है पाक में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर अंकुश लगाने के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना चाहिए।

शंकराचार्य से मिलने पहुंचे पाकिस्तानी हिंदुओं के जत्थे में शामिल लोगों ने कहा कि वे लोग वहां की घुटन भरी जिंदगी से तंग आ चुके हैं लिहाजा अब पाकिस्तान में नहीं लौटना चाहते।

उन्हें भारत की नागरिकता दी जाए। जत्थे में शामिल कंवरलाल, हरिचंद बागड़ी, चंद्रमान, द्रौपदी और राजकपूर आदि ने शंकराचार्य को उस पत्र की प्रति सौंपी जो उन्होंने भारत के राष्ट्रपति को दिया है।

धार्मिक संस्कार भी पूरे नहीं करने दिए जाते

पत्र में लिखा गया है कि पाकिस्तान में हिंदुओं को यातनाएं दी जा रही हैं। धार्मिक संस्कार भी पूरे नहीं करने दिए जाते।

त्योहार मनाने में भी बाधाएं आती हैं। बहू-बेटियों का अपहरण किया जाता है और जबरन धर्म परिवर्तित कराया जाता है।

इन लोगों ने बताया कि दिल्ली में इस समय पाकिस्तान से आए करीब 900 हिंदू हैं जो अब वापस नहीं जाना चाहते।

25 नागरिकों का जत्था पहुंचा दिल्ली

इस दल ने बताया कि पिछले सप्ताह पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों से 25 नागरिकों का जत्था दिल्ली पहुंचा है। जिसमें महिलाओं-पुरुषों के अलावा बच्चे भी शामिल हैं।

दिल्ली के बिजवासन निवासी नाहर सिंह ने सभी को शरण दी है। मदद की आशा में ये सभी शनिवार रात शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से मिलने हरिद्वार आए।

रात में कनखल की राजपूत धर्मशाला में रुके और सुबह साढ़े आठ बजे कनखल में शंकराचार्य से मिलने पहुंचे। जत्थे में शामिल अधिकतर लोग खेती करते हैं।
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मनमोहन, आडवाणी को नागरिकता तो हमें क्यों नहीं

पाकिस्तान से आए लोगों ने बताया कि उनके यहां हिंदू धर्म से जुड़े ऐतिहासिक पात्रों और हिंदी फिल्मों के अभिनेता-अभिनेत्रियों के नाम पर बच्चों के नाम रखने का क्रेज है।

जत्थे में शामिल एक सदस्य का नाम राजकपूर है तो एक महिला का नाम द्रौपदी है।

इन लोगों का कहना है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, इंद्रकुमार गुजराल और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने अविभाजित भारत में जन्म लिया था।

जो कि अब पाकिस्तान में है। जब इन्हें भारतीय नागरिकता मिली है तो हमें क्यों नहीं मिल सकती।
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