प्राचीन जैन मंदिर में वर्ष 1937 में निर्मित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की वेदी को तोड़े जाने से जैन समाज में भारी रोष है। इस एकतरफा कार्रवाई के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौन उपवास पर बैठ गए।हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर धरना दे रहे श्रद्धालुओं ने घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। धरने पर लोगों ने आरोप लगाया कि प्राचीन वेदी केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि उनकी ऐतिहासिक विरासत का अहम हिस्सा थी। इसे ढहाने से पहले जैन समाज को बिल्कुल विश्वास में नहीं लिया गया, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि साजिश के तहत पहले वेदी के पीछे बनी दीवार तोड़ी गई, जिससे ढांचे की मजबूती प्रभावित हुई और बाद में मौका देखकर वेदी को भी पूरी तरह ढहा दिया गया।श्रद्धालुओं ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए विपिन जैन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेताया है कि भविष्य में मंदिर की किसी भी संपत्ति या धरोहर में निर्माण, तोड़फोड़ या बदलाव से पहले समाज की सहमति लेने की स्पष्ट व्यवस्था लागू की जाए। मौन उपवास में पूर्व राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य संजय जैन, अनिल कुमार जैन, जीवनलता जैन, आशीष जैन, पारस जैन, आयुष, गौरव, अंशुल, रोहन, प्रशांत, वैभव, प्रदीप, कमल, विपुल आदि शामिल रहे।