विनिता ने की पहाड़ की महिलाओं के सामने नजीर पेश
रुद्रप्रयाग की विनिता देवी ने तो सास बहू के रिश्ते को लेकर पहाड़ की महिलाओं के सामने नजीर पेश की है। घास के लिए जंगल जाने के दौरान अपनी सास को गुलदार से बचाने के लिए उसने अपनी जान की परवाह नहीं की और गुलदार से भिड़ गई। गुलदार के हमले से वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इस अदम्य साहस के लिए उसे तीलू रौतेली पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।
चमोली जिले की नर्वदा देवी रावत हस्तशिल्प के क्षेत्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं। वह बताती हैं कि पिछले 20 साल से शॉल, पंखी आदि बना रही हैं। देश और दुनिया से बदरीनाथ आने वाले तीर्थ यात्री जिसे खूब पसंद करते हैं। पिथौरागढ़ की 72 वर्षीय शकुंतला दताल क्षेत्र में पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य आदि सुविधाओं को लेकर संघर्षरत है। उन्होंने भारत-चीन सीमा पर सीमांत गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए काम किया।
ये भी पढ़ें...सियासी हलकों में सवाल: क्या है शिष्टाचार भेंटों का सरोकार... पीएम मोदी और शाह से मुलाकातों का सिलसिला जारी
राज्य की साधारण महिलाओं ने जो असाधारण काम किया है उसने उन्हें बेहद खास बना दिया है। इन महिलाओं ने लीक से हटकर कुछ करने की सोची और अपने उस लक्ष्य को पूरा किया। -रेखा आर्या, कैबिनेट मंत्री महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास