राजधानी में अब मस्जिदों में ही निकाह पढ़ाया जाएगा। इसके बदले कोई शुल्क भी नहीं देना होगा। इसके अलावा फिजूल खर्चे से बचकर सादगी से निकाह कराया जाएगा। शुक्रवार को शहर काजी मुफ्ती हशीम अहमद सिद्दीकी ने इसका एलान किया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम सादगी, संजीदगी और हया का हुक्म देता है। ऐसी जगह जहां बेपर्दगी हो, वहां निकाह नहीं पढ़ाया जाएगा।
शहर काजी ने कहा कि निकाह इस्लाम में बहुत पाक और मजबूत इस्लामी समझौता है। अफसोस है कि आज इसे फिजूल खर्च, दिखावा और गैर जरूरी रस्मों से जोड़ दिया गया है जिससे इसकी असल रूह को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने एलान किया कि अब सिर्फ मस्जिदों में ही निकाह पढ़ाया जाएगा। मस्जिदों के इमामों के आर्थिक और समाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी कौम को मिलकर उठानी है। उनकी इज्जत हर मुसलमान पर लाजिम है। उलमा ए किराम को दीन की तालीम और तब्लीग में पूरी आजादी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों तक इंसाफ का पैगाम पहुंचाना और मशवरे में इंसाफ कायम रखना हर मुसलमान की बुनियादी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जाति, फायदे, खुदगर्जी, बिरादरीवाद के कारण जमाअते बनती हैं और फिर खुदगर्जी के कारण आपस में टकराकर अपनी मजबूती गंवा देती हैं। उन्होंने कहा कि अब ऐसी निजी महफिलों और कार्यक्रमों से दूरी रखी जाएगी जो इस्लामिक तौर तरीके या कानूनों के खिलाफ हो।