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ये है स्मार्ट सिटी का सच, पांच सौ करोड़ को ताक रहे केंद्र का मुंह

Thu, 22 Sep 2016 08:14 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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स्मार्ट सिटी - फोटो : डेमो फोटो
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केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में शामिल होने से चूके देहरादून को अब राज्य सरकार के स्तर से ही विकसित करने की मांग उठने लगी है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब प्रोजेक्ट में करीब दो तिहाई बजट राज्य सरकार को खर्च करना है तो महज पांच सौ करोड़ के लिए केंद्र सरकार का मुंह क्यों ताका जा रहा है।
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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत दून को स्मार्ट बनाने के लिए राज्य सरकार ने 1800 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया है। तीसरे चरण में केंद्र सरकार को जो प्रस्ताव भेजा गया, उसके तहत शहर के एक बड़े हिस्से में रेट्रोफिटिंग कर सुविधाओं का विकास करने की योजना तैयार की गई। हालांकि तीसरे चरण में भी केंद्र सरकार की सूची में दून को जगह नहीं मिल पाई है।

योजना में चुने जाने की दशा में प्रत्येक शहर को पहले साल दो सौ करोड़ और उसके बाद अगले चार सालों तक 100-100 करोड़ रुपये की सहायता केंद्र सरकार देगी। ऐसे में राज्य सरकार को अपने स्तर से 1300 करोड़ रुपये लगाने होंगे। इसके लिए तमाम योजनाओं को जोड़ने और पीपीपी मोड की योजनाओं को शामिल करने का प्रस्ताव है। राज्य सरकार हुडको से लोन लेने को तैयार है, जिस पर हुडको भी सैद्धांतिक सहमति दे चुका है।
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नगर निगम भी कम दोषी नहीं

स्मार्ट सिटी
ऐसे में अब राज्य सरकार के स्तर से ही स्मार्ट सिटी योजना पर काम शुरू करने की मांग उठने लगी है। पूर्व नौकरशाह, वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग राज्य सरकार से ही स्मार्ट सिटी की दिशा में काम करने की अपील कर रहे हैं।

वहीं स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में दून को न चुने जाने के लिए महापौर विनोद चमोली भले ही राज्य सरकार के कमजोर होमवर्क को जिम्मेदार ठहरा रहे हों लेकिन इसमें नगर निगम भी कम दोषी नहीं है। तीसरी बार प्रोजेक्ट के प्रस्ताव पर मेयर व नगर निगम अधिकारियों ने एमडीडीए और कंसलटेंसी के अधिकारियों से तीन बार चर्चा की।

बोर्ड मीटिंग में प्रस्ताव पर विस्तार से मंथन हुआ। बोर्ड की संस्तुति के बाद तैयार प्रस्ताव को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित हाईपावर कमेटी ने केंद्र सरकार को भेजा। राज्य सरकार के स्तर से प्रोजेक्ट में किसी तरह की काट-छांट नहीं हुई।

वैंकेया नायडू के बयान पर आश्चर्य

वेंकैया नायडू - फोटो : ANI
मंगलवार को तीसरी सूची के लिए शहरों के नाम घोषित करते वक्त केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू ने कहा कि उत्तराखंड में बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं के चलते शहरों का चयन नहीं किया गया है।

उनके इस बयान पर आश्चर्य इसलिए भी जताया जा रहा है क्योकि राज्य सरकार ने अप्रैल में जब प्रस्ताव भेजा था, तब बारिश या आपदा जैसे कोई हालात नहीं थे। केंद्र सरकार को प्रस्ताव के आधार पर प्रोजेक्ट को मंजूरी देनी थी, न कि प्रदेश की परिस्थिति के आधार पर।

वैसे भी इस साल प्राकृतिक आपदा से प्रदेश को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ और देहरादून में बाढ़ नहीं आई। उत्तराखंड से ज्यादा नुकसान उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में हुआ, उसके बावजूद दोनों राज्यों से शहर चुने गए। 

लगातार तीन मौके गंवाने के बाद अब राज्य सरकार को अपने स्तर से स्मार्ट सिटी डेवलप करने पर फोकस करना चाहिए। भाजपा और कांग्रेस दोनों को इस मुद्दे पर सकारात्मक सोचना चाहिए। 
-सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एसएस पांगती
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'पांच सौ करोड़ के लिए मुंह ताकना ठीक नहीं'

स्मार्ट सिटी - फोटो : अमर उजाला
स्मार्ट सिटी में राज्य खुद पहल कर सकता है। स्मार्ट सिटी बनने से कोई इंद्रलोक नहीं बन जाएगा। पांच सौ करोड़ के लालच में हम अटके हुए हैं। नेचुरल ब्यूटीफुल सिटी बनाने की दिशा में राज्य को आगे बढ़ना चाहिए।
-पीसी थपलियाल, महासचिव, उत्तराखंड रक्षा मोर्चा

पांच सौ करोड़ के लिए केंद्र का मुंह ताकना ठीक नहीं। सरकार और अरबन प्लानिंग के अधिकारी बेहतर प्लान बनाने में असफल साबित हुए। वैंकेया नायडू के तर्क को किसी भी तरह ठीक नहीं ठहराया जा सकता। कूड़ा निस्तारण जैसी छोटी समस्याओं का समाधान करने में हम असफल साबित हुए हैं। मूलभूत सुविधाओं पर फोकस करना चाहिए।
-अनूप नौटियाल, संरक्षक, हम

नगर निगम ने स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव में एमडीडीए और सरकार द्वारा हायर की गई कंपनी को यह सुझाव दिया था कि कैसे शहर के इलाके विकसित किये जा सकते है। कंपनी को तकनीकी रूप से ड्राफ्ट तैयार करना था। ड्राफ्ट में कमी के कारण ही स्मार्ट सिटी में शामिल शहरों में दून का नाम नहीं आ सका। इसीलिए निगम का कोई दोष नहीं है। 
-विनोद चमोली, महापौर, देहरादून
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