हिमालयी क्षेत्र को ‘लेस रिसर्चड एरिया’, ‘हिल्स विद नो डाटा बेस’ की संज्ञा देने वालों के मुंह पर बहुत जल्दी ताला लग जाएगा। अब हिमालयी डाटा बेस ऑनलाइन होगा। दुनिया भर के शोधार्थी इसका लाभ उठा सकेंगे।
नेशनल मिशन ऑन हिमालय के तहत हिमालयी क्षेत्र का डाटा बेस इकट्ठा होने लगा है। इसे और गति देने के लिए नीति आयोग ने हिमालयी टास्क फोर्स भी बना दी है। इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी जीबी पंत इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट को मिली है। साथ ही इस वित्तीय वर्ष के लिए 15 और नए प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं।
नेशनल मिशन ऑन हिमालय की पिछले सप्ताह हुई बैठक में हिमालयी टास्क फोर्स क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी मिशन की नोडल एजेंसी पंत इंस्टीट्यूट को दे दी गई है। इसकी अधिसूचना बहुत जल्द जारी हो जाएगी। इसके साथ ही मिशन ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
हिमालयी क्षेत्र में काम करने वाले देश के सारे संस्थान पंत इंस्टीट्यूट को अपना डाटा देंगे। अभी तक ये संस्थान और विज्ञानी अपने डाटा किसी से साझा नहीं करते थे। विश्व स्तर पर हिमालयी शोध के लिए विज्ञानियों को आकर्षित करने के लिए डाटा बेस ऑनलाइन होगा जिससे लोग हिमालयी विविधता जान सकें।
बीते साल हिमालयी क्षेत्र में 27 परियोजनाएं शुरू हुई थीं। 31 मार्च को इनके परिणाम का आकलन किया गया जो उत्साहवर्धक है। परियोजनाओं की वजह से जंगलों में आजीविका के संसाधन बढ़े हैं। चीड़ के पेरुल से लोग कपड़ा, गत्ता बना रहे हैं। इसके अलावा कारोबार के अन्य संसाधनों में भी इजाफा हुआ है। सौ करोड़ के प्रस्तावित बजट के साथ मंजूर हुए नए प्रोजेक्ट में क्लाइमेट चेंज, आजीविका, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, मानव-वन्य जीव संघर्ष आदि को शामिल किया गया है।
नेशनल मिशन ऑन हिमालय के तहत 15 नई परियोजनाएं मिली हैं। नीति आयोग ने जो हिमालयी टास्क फोर्स बनाई है, उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी दी गई है। पहली बार हिमालयी डाटा बेस ऑनलाइन होगा जिससे हिमालय को लेस रिसर्चड् एरिया कहने वालों के मुंह बंद होंगे।
- डॉ. पीपी ध्यानी, निदेशक जीबी पंत इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन एनवायरनमेंट एंड डवलपमेंट