विकासनगर और हरबर्टपुर शहर की सड़कों पर करीब एक हजार ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। हैरानी की बात है कि दोनों शहरों में एक भी ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन नहीं है। मजबूरी में चालकों को अपने घरों या किराये के कमरों में जाकर वाहनों की बैटरी चार्ज करनी पड़ती है। इससे ई-रिक्शा चालकों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।छोटे रूट की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब पूरी तरह से ई-रिक्शा के भरोसे है। यही कारण है कि विकासनगर और हरर्बटपुर में छोटे मार्गों पर यातायात के पुराने साधन विक्रम और ऑटो सड़कों से गायब होते जा रहे हैं। हर जगह ई-रिक्शा ही नजर आते हैं। हैरत की बात यह है कि इनकी सुविधा के लिए विकासनगर और हरबर्टपुर में एक भी ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन नहीं है। अगर बैटरी अचानक डाउन हो जाए तो उसे चार्ज करने के लिए चालक को घर ही जाना होता है। क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में ई-रिक्शा चालक को घर बैठना पड़ता है। छात्रों को स्कूल ले जाने और घर छोड़ने वाले ई-रिक्शा चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है। बैटरी चार्ज न होने पर उन्हें अपनी जगह किसी और चालक को काम पर भेजना पड़ता है। ई-रिक्शा चालक काफी समय से क्षेत्र में चार्जिग स्टेशन खोलने की मांग कर रहे हैं।