उत्तराखंड गठन के बाद से तीन चुनावों में सीएम की कुर्सी कब्जाने में कांग्रेस और भाजपा के वोट शेयर में महज एक प्रतिशत का ही अंतर रहा है। बीते 16 वर्ष में मतदान प्रतिशत लगातार बढ़ा, लेकिन दोनों दल अंतर की खाई को नहीं बढ़ा पाए। पिछले विधानसभा चुनाव में तो यह खाई महज आधे प्रतिशत में सिमट गई।
वर्ष 2002 को छोड़ दिया जाए तो वोट शेयर का अंतर नहीं बढ़ा पाने से भाजपा और कांग्रेस को छोटे दलों की बैसाखी के सहारे सरकार बनाना मजबूरी रहा। ऐसे में इस चुनाव में यह देखना अहम रहेगा कि क्लीन स्विप जैसे दावों के बीच वोट शेयर में कितना अंतर आता है।
उत्तराखंड में तीन विधानसभाओं में सर्वाधिक मतदान प्रतिशत 66.17 प्रतिशत वर्ष 2012 में रहा था। अधिक मतदान से सियासी दलों को एक तरफा नतीजों की उम्मीद थी, लेकिन नतीजे पिछले चुनाव के इर्द-गिर्द ही आए।
मतदान प्रतिशत तो बढ़ा पर दोनों में अंतर जस का तस
भाजपा
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चुनाव प्रतिशत बढ़ा पर उसमें भाजपा कांग्रेस ही नहीं बसपा को भी अपना वोट शेयर बढ़ाने का मौका मिला, जिससे गठबंधन के सहारे पांच साल कांग्रेस को सरकार चलानी पड़ी। यही वर्ष 2007 में भी हुआ, जब महज सवा प्रतिशत वोट शेयर अधिक होने से भाजपा ने गठबंधन में सरकार चलाई।
अगर पिछले तीन चुनावों में भाजपा, कांग्रेस और तीसरे स्थान पर रहने वाली बसपा के वोट शेयर की बात की जाए तो तीनों दलों को फायदा हुआ है।
हर चुनाव में राजनीतिक दल दो से तीन प्रतिशत तक अपना वोट शेयर बढ़ाने में कामयाब रहा है, लेकिन हार और जीत का अंतर एक प्रतिशत ही रहा। जिसका एक कारण उक्रांद सहित इक्का-दुक्का क्षेत्रीय दलों का वोट शेयर लगातार कम होना भी है।
टॉप तीन दलों का मतदान प्रतिशत
दल ------- वर्ष 2002 ---- वर्ष 2007 वर्ष 2012
भाजपा ----- 25.81 ------- 31.6 ------- 33.13
कांग्रेस ---- 26.91 ------- 29.9 ------- 33.79
बसपा ---- 10.93 ------- 11.76 ------- 12.9
निर्दलीय का वोट शेयर में बढ़ा हिस्सा
बसपा प्रतीक
उत्तराखंड में एक सीट पर औसतन दर्जन भर प्रत्याशी चुनाव लड़ते हैं, जिससे दलों का अपना वोट प्रतिशत बढ़ा पाना आसान नहीं रहता है। राज्य गठन के बाद पहले चुनाव में वर्ष 2002 में एक सीट पर 13 प्रत्याशियों की औसत मौजूदगी थी। इसके बाद हुए दो चुनावों में यह औसत घटकर प्रति सीट 11 रह गई है।
राष्ट्रीय दलों और क्षेत्रीय दलों समेत अन्य पंजीकृत दलों के 60 प्रतिशत प्रत्याशी होते हैं, जबकि शेष प्रत्याशी निर्दलीय उतरते हैं। कुल मतदान का 11 से 16 प्रतिशत वोट शेयर इन्हीं निर्दलीयों में बंट जाता है।
2002 में 927 प्रत्याशी रहे मैदान में, 346
2007 में 785 प्रत्यशी रहे मैदान में, 241 निर्दलीय
2012 में 788 प्रत्याशी रहे मैदान में, 268 निर्दलीय