दूसरी बात यह है कि जो रिजल्ट विवि ने जारी किया, उस पर आधिकारिक हस्ताक्षर नहीं थे। कुछ छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन भी करा लिया गया और रिवाइज रिजल्ट जारी कर दिया गया।
इस पुर्नमूल्यांकन के लिए किसने आदेश किए, इसका भी कोई प्रमाण विवि में उपलब्ध नहीं था। आपको बता दें कि इस पूरे प्रकरण में शासन ने करीब चार माह पूर्व विवि को कार्रवाई के आदेश जारी किए थे लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं गई है। दूसरी ओर, विवि की कुलसचिव प्रो. अनीता रावत का कहना है कि मामले में कार्रवाई की जा रही है।
कॉपी खोले बिना दे दिए नंबर
क्या ऐसा संभव है कि कॉपी चेक न हो, मार्क्स चढ़े न हों और केवल बाहर नंबर भर दिए जाएं। तकनीकी विवि में मूल्यांकन के नाम पर ऐसा मामला भी सामने आया। जांच समिति ने एक संस्थान के छात्र की कॉपी चेक की तो चेकिंग का कोई निशान तक नहीं था। सीधे बाहर अंक भर दिए गए थे। समिति ने इसकी विस्तार से जांच कराने की सिफारिश की है।
पीएचडी प्रवेश परीक्षा समन्वयक पर भी उठाए सवाल
जांच समिति ने पूर्व में पीएचडी प्रवेश परीक्षा समन्वयक की जिम्मेदारी संभालने वाले अरुण कुमार शर्मा पर भी सवाल खड़े किए हैं। समिति का तर्क है कि नियम विरुद्ध पीएचडी प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दी गई, जो कि खुद वहां से पीएचडी कर रहा है और जो उपनल के माध्यम से भर्ती है।
जबकि इस मामले में अरुण कुमार शर्मा का कहना है कि उन्हें न तो ऐसी किसी जांच की जानकारी है और न ही उन्होंने कोई नियम विरुद्ध काम किया है। कुलपति के निर्देश पर उन्होंने केवल ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा का आयोजन कराया था, जिसके पूरे दस्तावेज विवि में उपलब्ध हैं। उन्होंने जांच समिति को फर्जी करार दिया और कहा कि भविष्य में अगर उनसे सवाल पूछा जाएगा तो वह जवाब देने को तैयार हैं।