I- प्रभावित आठ परिवार हाईकोर्ट पहुंचे तो उन्हें एक दिसंबर तक मिली मोहलत, बाकी आठ परिवारों को राहत नहीं
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I- मकानों में रहने वालों का आरोप, उन्हें मकान खाली करने के लिए सूचना देर से दी गई
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जिला प्रशासन ने बृहस्पतिवार को शत्रु संपत्ति घोषित हुए काबुल हाउस को खाली कराने के लिए टीम भेज दी। टीम ने करीब 16 परिवारों से परिसर खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कराई। घरों में रखा सामान बाहर निकालकर दरवाजों पर सील लगा दी गई। पिछले करीब 70 सालों से वहां रहने वाले लोगों ने कार्रवाई का विरोध भी किया। वहां रहने वाले परिवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें मकान खाली करने के लिए सूचना देर से दी गई। प्रकरण में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए एक दिसंबर तक मकान खाली करने का समय दे दिया है, लेकिन यह राहत अन्य परिवारों को नहीं मिलेगी।
काबुल हाउस को शत्रु संपत्ति घोषित किया जा चुका है। आजादी के समय से यहां पर करीब 16 परिवार निवास कर रहे हैं। इन परिवारों का कोर्ट में मामला लंबित था। डीएम कोर्ट ने दो हफ्ते पहले अपने आदेश में कहा कि सभी परिवार 15 दिन के भीतर काबुल हाउस से कब्जा छोड़ दें। बृहस्पतिवार सुबह जिला प्रशासन की टीम मौके पर कब्जा लेने के लिए पहुंच गई। इससे वहां पर अफरातफरी की स्थिति बन गई। यहां रहने वाले परिवारों ने अपना विरोध जताया। लेकिन टीम ने पुलिस के सहयोग से सभी के घरों में रखा सामान बाहर रख दिया। दरवाजों में सील लगाकर घरों के बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए। कुछ लोग अपना सामान लेकर चले गए, जबकि कई लोग देर शाम तक घरों के बाहर परिवार सहित बैठे रहे। करीब आठ परिवार हाईकोर्ट चले गए, इन लोगों को एक दिसंबर तक का समय मिल गया है, लेकिन यह राहत उन आठ परिवारों को नहीं मिलेगी जो हाईकोर्ट नहीं गए। सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष कुमार ने बताया कि कोर्ट में दिए गए आदेश के मुताबिक निर्धारित समय पर टीम को कब्जा लेने के लिए भेजा गया। इसमें से कुछ लोग बृहस्पतिवार दोपहर हाईकोर्ट चले गए। इन याचिकाकर्ताओं को एक दिसंबर तक हाईकोर्ट ने राहत दे दी है। इस समयावधि में यह लोग खुद अपना कब्जा यहां से छोड़ देंगे, कोर्ट का यह आदेश कार्रवाई पूरी होने के बाद आया।
Iकाबुल हाउस पर अफगानिस्तान के शासक का था मालिकाना हकI
अफगानिस्तान के शासक मोहम्मद याकूब खान का 19वीं और 20वीं में इस काबुल हाउस पर मालिकाना हक था। काबुल हाउस में रहने वाले अफगानी शाही परिवार के लोग देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान में जाकर बस गए। 19 बीघा में फैले इस इलाके में तब से कुछ परिवार रह रहे थे। देहरादून की डीएम सोनिका ने मामले की लंबी सुनवाई के बाद यहां रहने वाले परिवारों को परिसर खाली करने का आदेश दिया था।