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Iपुलाव के शौकीन थे अफगान, दून में शुरू कराई बासमती की खेतीI
शत्रु संपत्ति घोषित होने के बाद चर्चाओं में आया काबुल हाउस का राजधानी देहरादून से गहरा नाता रहा है। इतिहासकारों का कहना है, विश्वविख्यात दून की बासमती काबुल हाउस में रहे अफगान राजपरिवार की ही देन है। इतना ही नहीं यहां के लोगों को उन्होंने बासमती की खेती करनी भी सिखाई। काबुल हाउस में कुछ परिवार रहते थे, जबकि कुछ हिस्से में मंगला देवी इंटर कॉलेज चलाया जाता है।
इतिहासकार लोकेश ओहरी ने बताया, करीब 200 साल पहले दोस्त आमिर मोहम्मद खान और आमिर याकूब खान का शाही परिवार अफगानिस्तान के काबुल से निकलकर दून आया और वह दून में बस गया। उनके पूर्वज अफगानिस्तान के अंतिम राजवंश थे, जिन्हें अंग्रेजों ने निर्वासित कर दिया था। ईसी रोड स्थित ही वह काबुल हाउस में अपना जीवन व्यतीत करने लगे। दून की विश्वविख्यात बासमती की शुरूआत ही इन दोनों अफगान राजघरानों की ओर से की गई।
बताया, मोहम्मद खान पुलाव के शौकीन थे और अपने निर्वासन के दौरान इसे याद करते थे। ऐसे में वह अफगानिस्तान से बासमती का बीज लाए और पलटन बाजार के व्यापारी शेख सरनीमल को दिए और उसे देहरादून में बासमती की खेती करने को कहा। बाद में याकूब खान ने बासमती की खेती जारी रखी। हैरानी की बात है कि दून घाटी का मौसम चावल के अनुकूल था और यह अफगानिस्तान की किस्म से भी बेहतर निकला। दोस्त मोहम्मद खान के परिवार से नाता रखने वाले असलम खान उत्तर प्रदेश में मंत्री रह चुके हैं।
Iजहां लगती है बच्चों की पाठशाला वहां था अस्तबलI
मंगला देवी इंटर कॉलेज स्कूल में जहां वर्तमान में बच्चों की पाठशाला लगती हैं वहां अफगान राजपरिवार का अस्तबल हुआ करता था। जबकि सर्वे चौक समीप पुलिस चौकी में उनके सुरक्षा कर्मी रहते थे। ईसी रोड स्थित बिजली कार्यालय में उनका गेस्ट हाउस था। बाद में काबुल हाउस को आयुर्वेदा सेवा सदन के संस्थापक जया नंद बहुगुणा ने शिक्षा के लिए इस्तेमाल किया, जो आज मंगला देवी इंटर कॉलेज है। यहीं से शिक्षा और आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार किया जाता था।