स्वच्छता सर्वेक्षण में दून को टॉप-50 शहरों में शामिल करने की मंशा पर गंदगी से पटे नदी-नाले ग्रहण की तरह है। रिस्पना और बिंदाल नदी कूड़ा डंपिंग जोन बनी हैं, जबकि नाले-नालियां भी गंदगी से अटी हैं। हर साल नदी, नालों की सफाई के नाम पर निगम पानी की तरह रुपये बहा रहा है। लेकिन हालत अभी भी जस के तस है।
नगर निगम दून को देशभर में स्वच्छता में टॉप-50 शहरों में शुमार करने का सपना तो देख रहा है। लेकिन सपना हकीकत में तब्दील हो इसके लिए गंभीरता से प्रयास करता नहीं दिख रहा है। बिंदाल और रिस्पना नदी का स्वरूप आज नाला बन गया है। दोनों नदियों में गंदगी का अंबार लगा है। नदियों का प्रयोग कूड़ा डंपिंग के लिए हो रहा है। यहां तक कि लोक अदालत भी रिस्पना, बिंदाल में कूड़ा फेंके जाने पर नगर निगम को कई बार तलब कर चुका है, लेकिन आज तक निगम की ओर से इस दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है।
दून के नाले, नालियों की हालत खराब है। नियमित सफाई न होने से नाले, नालियां गंदगी से अटे हैं। सालभर निगम को इन नाले-नालियों की सफाई की याद नहीं आती। बरसात से पहले इनकी सफाई के नाम पर लाखों रुपये बहाए जाते हैं। इसके बाद भी बरसात का पानी सड़कों में बहता है। खामियाजा दून को जलभराव के रूप में झेलना पड़ता है। ऐसे में दून को टॉप-50 शहरों में शामिल करना किसी सपने से कम नहीं लगता।
Iरिस्पना, बिंदाल में कूड़ा डालने पर कार्रवाई की जाती है। पकड़े जाने पर चालान किया जाता है। साथ ही नाले-नालियों की सफाई कराई जाती है। - अविनाश खन्ना, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारीI