सात जुलाई को भगवान जगन्नाथ द्रोणनगरी की सड़कों पर भ्रमण कर भक्तों को दर्शन देंगे। रथयात्रा के लिए भगवान जगन्नाथ 20 फीट लंबे और 12 फीट चौड़े रथ पर सवार होंगे। आयोजकों की ओर से इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। भगवान जगन्नाथ 14 दिन बाद शनिवार को भक्तों को दर्शन देंगे।
श्री श्री जगन्नाथ जी रथयात्रा समिति और श्रीराम मंदिर समिति दीपलोक कॉलोनी की ओर से इस बार 27वीं रथयात्रा निकाली जाएगी। रथ में भगवान जगन्नाथ के साथ ही सुभद्रा जी, बलभद्र जी सवार होंगे। रथयात्रा रविवार को दीपलोक के श्रीराम मंदिर से शुरू होगी और किशन नगर चौक, पलटन बाजार होते हुए शहर के कई प्रमुख मार्गों से निकाली जाएगी। समिति के संस्थापक डॉ. सुभास चंद्र शतपथी, श्री राम मंदिर समिति के सचिव अरविंद मित्तल ने बताया कि रथयात्रा का संचालन 50 युवाओं की टीम करेगी।
I27 साल पहले ही बना था रथI
राजधानी दून में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के लिए 27 साल पहले रथ तैयार किया गया था। उस समय इस रथ को ओडिशा के कारीगरों ने ही बनाया था। यात्रा के लिए हर साल इसे नया स्वरूप दिया जाता है। इस बार भी रथ में छह पैर के साथ ही अन्य बदलाव किए गए।
Iआज खुलेंगे मंदिर के कपाटI
भगवान जगन्नाथ जी मंदिर के कपाट शनिवार को खुल जाएंगे और भक्त दर्शन कर सकेंगे। बीमार होने के बाद 14 दिन तक भगवान जगन्नाथ एकांतवास में चले गए थे। यहां उन्हें काढ़े का ही भोग लगाया जा रहा था। 14 दिन बाद स्वस्थ होने के बाद भगवान जगन्नाथ, भाई-बहन के साथ नवयौवन स्वरूप में दर्शन देंगे।
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I‘जगन्नाथजी की सेवा का पुण्य मिलना सौभाग्यशाली’I
आचार्य सुशांत राज ने बताया कि हर साल आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से ही रथयात्रा का आयोजन होता है। मान्यता है कि रथ यात्रा का साक्षात दर्शन करने भर से ही एक हजार यज्ञों का पुण्य मिल जाता है। भगवान जगन्नाथ जी की सेवा का पुण्य प्राप्त होना बड़ा सौभाग्यशाली है।