दून अस्पताल परिसर में एक डॉक्टर साहब दुखी मुद्रा में खड़े थे। बेचारे दिन रात अस्पताल में मरीजों की सेवा करते हैं और फिर भी करेक्टर रोल (सीआर) उत्तम नहीं मिलता।
उनसे परेशानी का कारण पूछा तो कहने लगे कि साहब की चापलूसी करो तो सीआर बढ़िया हो जाती है। ऐसे में काम करने वाले का ही नुकसान होता है।
उसी वक्त दो डॉक्टर सामने से गुजरे तो उन्होंने बताया कि दोनों डॉक्टर एक ही बैच के थे। एक ने चापलूसी के दम पर उत्कृष्ट सीआर ले लिया और अपने साथी का सीनियर बनकर बैठ गया।
तभी वहां डॉक्टरों के नेता आए और बोले पहले हम भी बहुत काम करते थे और सीआर उत्तम नहीं आती थी। खूब परेशान होते रहे। फिर ज्ञान उदय हुआ। काम करना बंद किया और नेतागीरी करने लगे। तबसे हमेशा उत्कृष्ट सीआर आती है।