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उत्तराखंड में हर साल दर्ज होते हैं अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों पर अत्याचार के औसतन 70 मामले

Fri, 02 Oct 2020 03:46 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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उत्तराखंड में हर साल अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों पर अत्याचार के औसतन 70 मामले पुलिस के पास दर्ज हो रहे हैं। उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग में भी उत्पीड़न की कई शिकायतें पहुंच रही हैं। पिछले एक साल में आयोग में उत्पीड़न की 416 शिकायतें आईं। जिनमें करीब 60 फीसदी मामलों का निपटारा नहीं हो पाया है।

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आयोग के मुताबिक, कोरोना के कारण शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हो पाई। आयोग मानता है कि उत्पीड़न की शिकायतों की संख्या अधिक होती, यदि कुमाऊं में शिकायतें प्राप्त करने और उनकी सुनवाई के लिए अलग से व्यवस्था होती। 

उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के आंकड़े बता रहे हैं कि आयोग में गढ़वाल की तुलना में कुमाऊं मंडल से बहुत कम शिकायतें पहुंची हैं। ये आंकड़ा कुल शिकायतों का करीब 36 फीसदी है। आयोग के मुताबिक, कम शिकायतें आने का मतलब यह नहीं है कि कुमाऊं में अनुसूचित जाति वर्ग के उत्पीड़न की घटनाएं गढ़वाल से कम हो रही हैं।
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दरअसल कुमाऊं से देहरादून की दूरी अधिक होने के कारण लोग आयोग तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसलिए अब आयोग कुमाऊं में भी एक दफ्तर खोलने पर विचार कर रहा है। आयोग के उपाध्यक्ष पीसी गोरखा कहते हैं, शासन को इसका एक प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि नवंबर या दिसंबर माह तक आयोग कुमाऊं मंडल के हल्द्वानी से भी शिकायतों की सुनवाई करना शुरू कर देगा।
 

अपराधों के आंकड़े

उत्तराखंड में एससी व एसटी वर्ग पर अपराधों के आंकड़े

वर्ष         -     2014  - 2015  - 2016 -  2017-   2018
अनुसूचित जाति  -  60  -  80   -    65  -    96 -    58
अनुसूचित जनजाति - 01  - 06   -    03  -   11 -   07

अनुसूचित जाति आयोग में दर्ज शिकायतों का जिलेवार ब्योरा

जिला   -   शिकायतें     -  लंबित     
पौड़ी       34            15
टिहरी      17            09
उत्तरकाशी    23            13
चमोली        10               03
रुद्रप्रयाग      03              01
देहरादून      117              55
हरिद्वार     62               30
 ऊधमसिंह नगर 62         52
चंपावत       03             0             03
नैनीताल     39             34
अल्मोड़ा    23             16
बागेश्वर     05             04   
पिथौरागढ़    18            16
कुल योग   416          247
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महिला अत्याचार के 24 मामले दर्ज

उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग में पिछले एक साल के दौरान महिला अत्याचार के 24 मामले दर्ज हो चुके हैं। हाल ही में नैनीताल जिले के बिंदुखत्ता में एक महिला ने शिकायत की थी कि जातिगत आधार पर उसके परिवार को अपने भूखंड पर आवास नहीं बनाने दिया गया। यह मामला आयोग में आया था। मामले में मुकदमा दर्ज हो चुका है।

इन तरह की आईं शिकायतें

नियुक्ति पदोन्नति, ट्रांसफर  -25
भूमि संबंधित           -   27
जल संबंधित           -   04   
नागरिक अधिकारों से संबंधित  -35  
महिला अत्याचार            -  24
अन्य                      - 301
कुल                   -      416

आयोग में अभी 247 शिकायतों का निस्तारण होना बाकी है। कोरोना के कारण सुनवाई नहीं हो पाई। कुछ शिकायतों का निस्तारण ऑनलाइन किया गया। दर्ज शिकायतों में से अधिकांश की जांच रिपोर्ट आ चुकी हैं। अक्तूबर महीने से सुनवाई शुरू हो जाएगी। कुमाऊं में सुनवाई के लिए अलग से व्यवस्था करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
- पीसी गोरखा, उपाध्यक्ष, अनुसूचित जाति आयोग

प्रदेश में एससी व एसटी वर्ग के लोगों पर उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अधिकांश मामलों में शिकायतें तक दर्ज नहीं होती हैं। एससी वर्ग की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। फेडरेशन की ओर से भी कई बार मामला उठाया गया। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि लोग बेहिचक शिकायतें दर्ज करा सकें और उन पर पुलिस और प्रशासन निष्पक्ष भाव से कार्रवाई करे। इस बारे में मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को मांगपत्र सौंपा जाएगा।
- करम राम, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन
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