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विवादों में उत्तराखंड खेल रत्न, ओलंपियन मनीष ने अवार्ड पर उठाए सवाल

Sun, 06 Nov 2016 02:12 AM IST
हिमांशु जोशी/अमर उजाला, देहरादून
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मनीष रावत - फोटो : file photo
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खेल रत्न अवार्ड एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। खुद को नजरअंदाज किए जाने पर ओलंपियन मनीष रावत ने खेल रत्न अवार्ड पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह से उत्तराखंड में राजनीति चलती रही तो मैं नेशनल गेम्स में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व नहीं करूंगा।
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राज्य सरकार ने शनिवार को उत्तराखंड खेल रत्न, द्रोणाचार्य और लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड की घोषणा की। बाजपुर निवासी ओलंपियन गुरमीत सिंह को सरकार ने खेल रत्न अवार्ड के लिए चुना है।

इस अवार्ड के लिए रियो ओलंपिक में 13वें स्थान पर रहे मनीष रावत ने भी आवेदन किया था। मनीष का कहना है कि मैं 2006 से उत्तराखंड के लिए खेल रहा हूं और कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया है। जबकि गुरमीत सिंह कई राज्यों से खेल चुका है।
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पंजाब सरकार से भी अवार्ड ले चुके हैं गुरमीत: मनीष

गुरमीत स‌िंह - फोटो : file photo
मनीष ने बताया कि गुरमीत को 2013 में पंजाब सरकार ने भी महाराणा रणजीत सिंह अवार्ड दिया था। गुरमीत सिंह रियो ओलंपिक में डिस क्वालीफाई हो चुके थे, जबकि उन्होंने ओलंपिक मेडलिस्ट को पछाड़कर 13वां स्थान हासिल किया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन अवार्ड में राजनीति हुई है। यदि ऐसे ही राजनीति होती रही तो मैं नेशनल गेम्स में उत्तराखंड की ओर से नहीं खेलूंगा।

उन्होंने कहा कि यह अवार्ड उसी खिलाड़ी को दिया जाना चाहिए, जो डिजर्व करता हो। खेलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। मैं अब केवल पुलिस गेम्स ही उत्तराखंड के लिए खेलूंगा।  

गुरमीत ने भी विवाद पर तोड़ी चुप्पी
मनीष को इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए। जहां तक महाराणा रणजीत सिंह अवार्ड की बात है तो मैं 2004 से 2008 तक पंजाब पुलिस में रहा। इस दौरान मैंने नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, जिसके लिए वहां की सरकार ने मुझे यह पुरस्कार दिया। खेल रत्न अवार्ड मुझे 2011 से अब तक की परफार्मेंस के लिए मिला है। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता। 
-गुरमीत सिंह, ओलंपियन 
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