उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में शुरू हुई सेमेस्टर परीक्षा के पहले ही दिन छात्रों को एक पेपर ने परेशान कर दिया। छात्रों का आरोप है कि यह पेपर पुराने पाठ्यक्रम से आया। इसमें 100 अंकों का पेपर था जबकि नए पैटर्न के हिसाब से 75 अंकों का होना चाहिए। आनन-फानन में सभी परीक्षा केंद्रों पर पेपर में परिवर्तन कराने के साथ अलग से बहुविकल्पीय प्रश्न भेजे गए। छात्रों का आरोप है कि इस प्रक्रिया की वजह से उनका समय खराब हुआ है, जबकि विवि प्रशासन ने समय रहते पूरी प्रक्रिया संपन्न होने की बात कही है।
सोमवार को तकनीकी विवि में फार्मेसी द्वितीय सेमेस्टर का प्रथम प्रश्न पत्र था। जैसे ही छात्रों के हाथ में यह पेपर आया तो वह पुराने सिलेबस का पेपर देखकर परेशान हो गए। सुबह 9:30 बजे से जैसे ही प्रश्नपत्र छात्रों का मिला तो छात्रों ने संबंधित परीक्षा केंद्र अधिकारी से इसकी शिकायत की। इस कारण परीक्षा शुरू नहीं हो पाई। आनन-फ ानन में परीक्षा केंद्रों के अधिकारियों ने तकनीकी विवि में संपर्क किया। विवि की ओर से तत्काल प्रश्नपत्र से हल करने वाले सवालों की संख्या घटवाई गई। साथ ही सभी परीक्षा केंद्रों को नए पैटर्न के हिसाब से विवि ने बहुविकल्पीय प्रश्न ई-मेल के माध्यम से भेजे। तब जाकर परीक्षा शुरू हो पाई। छात्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया में उनका करीब डेढ़ घंटे का समय खराब हो गया। क्योंकि ई-मेल से आए सवालों का पहले प्रिंट निकाला गया, इसके बाद बांटा गया। यह परीक्षा देहरादून, रुड़की के अलावा कुमाऊं के पांच केंद्रों पर आयोजित की गई। हालांकि विवि प्रशासन ने इसमें समय खराब होने की बात से इंकार किया है।
पेपर में पुराने सिलेबस की बात का पता जैसे ही लगा, तुरंत उसमें परिवर्तन कराया गया। छात्रों को नए पैटर्न के हिसाब से कम सवाल हल करने का विकल्प दिया गया। साथ ही हमने समय रहते छात्रों को बहुविकल्पीय प्रश्न उपलब्ध कराए। इस प्रक्रिया में अधिक समय नहीं लगा है। वैसे भी विवि की परीक्षा समिति पहले ही तय कर चुकी है कि छात्रों को हर पेपर में तीन घंटे का समय दिया जाएगा। विवि ने 50 अन्य पेपर कराए, जिसमें कहीं कोई परेशानी नहीं हुई।
- डॉ. अलकनंदा अशोक, परीक्षा नियंत्रक, तकनीकी विवि